Book Title: Aagam Sambandhi Saahitya 04 Aagam Sootr Laghu Bruhat Vishayanukram
Author(s): Anandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Param Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
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आगम संबंधी साहित्य
[भाग-4] उपांग-सूत्र-लघुबृहविषयानुक्रमौ
[ उपांगसूत्र-४ “प्रज्ञापना" ] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण पुन: संकलित: उपांग+प्रकीर्णक-सूत्रस्य विषयानुक्रमः (आगम-संबंधी-साहित्य)
प्रत सूत्रांक
श्रीउपा. विषयानुक्रमे
यहां
मज्ञा.
देखीए
दीप क्रमांक के लिए देखीए
३१६, २२१ जीबनारकादीनां सब्जि- | वधिविचारः ३२१ । ५४३/ दीनामल्पबहुत्वम् ३२९। ५५३
स्वादिविचारः। ५३४ ॥इति प्रयस्त्रिंशत्तममवधिपदम् ॥ ॥ इति चतखिशत्तम प्रवीचारपदम ॥ LI. वृहद् ॥ इत्येकत्रिंशसमें सब्जिपदम् ।। ।३२२, २२५* अनन्तरागताहारादि-
विषयानुक्रमः
| ३३०, २२७* शीतद्रव्यशारीरादि३१७, २२२* जीवनारकादीनां संयत- (७)द्वारगाथै२२५२, नारकादी
द्वारगाथे२२७ , नारकादीनां स्वादिविचारः।
नामनन्तराहारादिवैक्रियान्तस्य । शीतादिद्रव्यादिशारीरादिसातादि॥ इति द्वात्रिंशत्तम संयतपदम् ।। विचारः।
५४० दुःखादिवेदना। ५५६ ३१८, २२३* भेदविषयसंस्थानादि- ३२३ नारकादीनामाहारपुद्गलज्ञाना- ३३, नारकादीनामौपक्रमिक्यादि.. (१०) द्वारगाथा२२३, भवः | ज्ञानादि।
वेदनाविचारः । प्रत्ययक्षायोपशमिकस्वामिनः । ५३९ ३२१ देवानां देवीतत्परिचारणादि ३३२ नारकादीनां निदाऽनिदा नारकादीनामनुत्तरान्तानामवधि३२४कायस्पर्शरूपशब्दमन:
वेदनाविचारः क्षेत्रमानम् ।
५४१ प्रवीचारविचार:३२५इच्छा- ॥ इति पञ्चत्रिंशत्तम वेदनापदम् ॥ ३२१ नारकादीनामवधेराकारः३२० मनस उपशान्तिः३२६देवशुक्र- २२८* वेदनादिसमुद्घातास्तत्स्वामिनश्च ।
नारकादीनामन्तरदेशानुगामि- " । पुद्गलपरिणामः३२७स्पर्शादिवर्द्धमानप्रतिपात्यवस्थितेतरा- प्रवीचाररीतिः३२८कायप्रवीचारा- | ३३३ वेदनादिसमुद्घातकालमानं,
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'सवृत्तिक आगम
सुत्ताणि
॥६२ ॥
~264~
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