Book Title: Aagam Sambandhi Saahitya 04 Aagam Sootr Laghu Bruhat Vishayanukram
Author(s): Anandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Param Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
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आगम संबंधी साहित्य
नन्दी-आदि-सप्त-सूत्राणां-लघुबृहविषयानुक्रमौ
[आगम-४५] चूलिका-२ 'अनुयोगद्वार' पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण पुन: संकलित: नन्दी-आदि-सूत्रस्य विषयानुक्रम: (आगम-संबंधी-साहित्य)
प्रत
सूत्रांक
यहां
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देखीए
दीप
निष्पना, विभागनिष्पने समवावि (१) नोइन्द्रिये (३) अनुमाने पूर्ववत् १४७ बक्तम्वताः (३) २४३ पुद्रलपरावर्चान्तं १७५
क्षतवर्णाविना शेषवत् ( कार्यकारण- १४८,१२३* अर्थाधिकाराः २४५ १३७,१०४-१०६ समयप्ररूपणा, आव- गुणावयवाशयैः) दृष्टसाधर्म्यवत् (सा-१४९,१२४* समवतारे नामायाः (६)२४७॥ लिकादि पल्योपमान्तं १८३
मान्यविशेषाभ्या) (अतीताऽनागतव- ॥ अथ निक्षेपाधिकारः॥ १३८,१०७-११०* उद्धाराद्वाक्षेत्रपल्यसा- समानाः) औपम्य साधर्म्यवैधये १५०,१२५-१३१* निक्षेपे ओपनामसूत्रागरोपमाणि।
आगमे लौकिकलोकोत्तरौ सूत्राों- छापकाः, ओघे अध्ययनाक्षीणाय-| १३९,१११-११२* दण्डकेषु स्थिति: १८४ भये, दर्शने (४) चारित्रे (५) २२१ क्षपणानिक्षेपाः, नानि सामायिक१४०,११३, सूक्ष्मेतरक्षेत्रपस्यसागरो- १४५ नयप्रमाणे प्रस्थकवसतिप्रदेशदृष्टा
निक्षेपः, उरगागुपमाः (१२) २५७ दिपमाः १९२
न्ता: २२७
॥ अनुगमाधिकारः॥ १४१ षट् द्रव्याणि १९३
१४६,११९-१२२% संख्यायां नामस्थापना-१५१-१३२-१३ अनुगमे सूत्रानुगमनिर्यु१४२ शरीरभेदा बद्धमुक्ताभ्यां दण्डकेषु२०९/ द्रच्यौ (एकभबिकादि) पम्बपरिमाण- स्वनुगमौ, अन्ये निक्षेपोपोद्घात१४३ भावप्रमाणानि(३)गुणनयसंख्याः११० जाणणा (कालिकवतादि) (सद- (२७) सूत्रस्पर्शाः (संहिवादि) २६१॥ १४४,११४-११६* गुणा जीवा(८)ऽजीव- सदादिना) गणनाभावाः, जघन्य- ॥नयाधिकारः॥
योः, अजीवे वर्ण (4) गंध (२) रस- मध्यमोत्कृष्टानि संख्यातानि, परित्तयु-१५२-१३६-१४३ नये नेगमाद्याः, ज्ञान(५) स्पर्श (८) संस्थानानि (4) जीवे कअसंख्यासंख्येषु जघन्यायाः, परि- क्रिये च । २६७ ज्ञाने प्रत्यक्षादि (४) प्रत्यक्षे इन्द्रिय- तयुतानन्तानन्तकेषु जघन्वाचा:२४१ इति श्रीअनुयोगद्वाराणि
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क्रमांक के लिए देखीए 'सवृत्तिक आगम
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सुत्ताणि
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