Book Title: Aagam Sambandhi Saahitya 04 Aagam Sootr Laghu Bruhat Vishayanukram
Author(s): Anandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Param Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
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आगम संबंधी साहित्य
नन्दी-आदि-सप्त-सूत्राणां-लघुबृहविषयानुक्रमौ
[आगम-४५] चूलिका-२ 'अनुयोगद्वार' पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण पुन: संकलित: नन्दी-आदि-सूत्रस्य विषयानुक्रमः (आगम-संबंधी-साहित्य)
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प्रत
सूत्रांक
यहां
अनुयोग०
वृद्धविषयानुक्रमः
देखीए
२४७
दीप क्रमांक के लिए देखीए 'सवृत्तिक आगम
१२५ नामिकनैपातिकाऽऽख्यातिकौपसर्गिक- योच्छासाकारगुणवतभणितिभिः १३२ १३१ प्रमाणभेषाः (१) १५१
मित्रभेदाः पचनामनि ११३ १२८,५७-६२० अष्टनामनि विभक्तयः १३२,९३-९४७ द्रव्यप्रमाणे प्रदेशनिष्पन्नवि-C १२६ पण्णानि औदयिकः
(निर्देशाद्याः) १३३
मांगनिष्पन्ने मानोन्मानाबमानगणिजीवा (३४) जीवो (५२०) दय- १२९,६३-८२७ नवनामनि वीराधा रसाः मप्रतिमानानि, घान्यमाने असखादि, निष्पन्नौ, औपाशमिक उपशमनि- सस्वरूपदृष्टान्ताः १३९ |
रसनाने चतुःषष्टिकादि, उन्मानेऽर्ध-14 प्पन्नश्च (११) क्षायिका क्षयनि-१३०,८३-५२० दशनाम गौणागौणादानपन्नश्च (४६) क्षयोपशमः (१),
कर्षादि, अवमाने हस्तादि, गणिम परप्रतिपक्षपदप्रधानताऽनादिसिद्धा. क्षयोपशमनिष्पन्नश्च (५१) पारिणा- तनामावयवसंचोग (४) प्रमाणैः |
एककादि, प्रतिमाने गुंजादि, १५५ मिकः साद्य (जीर्णसुरादीपत्प्राग्भा
(४) (स्थापनाप्रमाणे मात्र १३३,९५-१०२% क्षेत्रप्रमाणे प्रदेशनिष्पन्नः रान्तः ) नादिको (धर्मास्तिकायादि देवतापाषण्डगणजीविकाहेत्वाभिप्रा- विभागनिष्पन्ने पल (३ सूचिधन१०)सान्निपातिकः (1 ) यिकानि (७) भावप्रमाणे सामासि- प्रतर.) वितस्त्यावलोकान्तं, नैश्चयि
कत्तद्धित्तज(७) कर्मशिल्पश्लोकसंयो- कपरमाण्वादि, २४ दण्डकेवगाहना |१२७,२५-५६* सप्तनाभनि पहजाचाः का- गसमीपसंयुतैश्वर्यापत्यैः) धातुनै- भेदाः, प्रमाणाहुल १७३ रणलक्षणग्राममूर्छनास्थामयोनिसम- | इकानि १५.
(१३४-१३१,१०३* काळप्रमाणभेदी, प्रदेश
॥१३४॥
सुत्ताणि
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