Book Title: Aagam Sambandhi Saahitya 04 Aagam Sootr Laghu Bruhat Vishayanukram
Author(s): Anandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Param Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad

View full book text
Previous | Next

Page 340
________________ आगम संबंधी साहित्य नन्दी-आदि-सप्त-सूत्राणां-लघुबृहविषयानुक्रमौ [आगम-४०] मूलसूत्र-१ 'आवश्यक' पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण पुन: संकलित: नन्दी-आदि-सूत्रस्य विषयानुक्रम: (आगम-संबंधी-साहित्य) प्रत सूत्रांक यहां -1994 देखीए दीप क्रमांक के लिए देखीए 'सवृत्तिक आगम १२९ प्रवचन (५) सूत्रा (५) नुयोगै (५)- ॥ अथोपोद्घातनियुक्तिः॥ १४९ कुलकरवंशेक्ष्वाकु कुलाधिकाराः कार्थिकानि। |१४०-१४१ सद्देशनिर्देशादीनि (२६ उपो- १५०-१५१ पस्योपमाष्टभागे पक्षिणमध्य-| १३२ अनुयोगनिक्षेपाः (६) ८७ घातनियुक्तिद्वाराणि) १०४ । भरते कुलकराः (७) १०९ १३३-१३४ वत्सकगवाद्या दृष्टान्ताः (५) १४२-१४३ सद्देशनिर्देशनिक्षेपाः (८) तद्वि-१५२ पूर्वभवजन भावे श्रावकभार्यायाः (७) ८८ शेषश्च १०६ द्वाराणि । ११० षकविभाषकव्यक्तिकरेषु काष्ठक-१४४ निर्देशयनिक १५३-१५४ अपरविदेहेषु वयस्यौ, भरते र्भाधुपमाः (६) ९६ चारः १०६ हस्ती मनुष्यश्च, नाम नीतिश्च १३६ व्याख्यानविधौ गोचन्दनकन्यायाः १४५ निर्गमनिक्षेपाः (६) १०७ |१५५-१६८ कुलकराणांनामप्रमाणसंहननव | सप्रतिपक्षाः (७) दृष्टान्ताः। नौसंस्थानोश्चत्ववर्णायु:स्यायुःकुल॥ अथ वीरजिनादिवक्तव्यता ॥ करत्वकालदेवत्ववस्त्रीहस्त्युपपातनी१३७ शिष्यदोषगुणाः १०० . १४६ अटवीभ्रष्टसाधुमार्गदर्शने सम्य- तयः १११ १३८-१३९ शिष्यपरीक्षायां शैलपनकुटावयः क्त्वम् १०८ |१६९-२४ मानवकारण्डनीतिक, आहार ऋष(१४) १०० १-२४ तदेव १०९ भव, भरतस्य परिभाषणाचा (४) इत्युपक्रमादि |१४७-१४८ साध्वनुकम्पया सम्यक्त्वं,देवत्वं, नीतिः । ११४ मरते मरीचिः १०९ . ऋषभवक्तव्यसासूचा ११४ सुत्ताणि ~340

Loading...

Page Navigation
1 ... 338 339 340 341 342 343 344 345 346 347 348 349 350 351 352 353 354 355 356 357 358 359 360 361 362 363 364 365 366 367 368 369 370 371 372 373 374 375 376 377 378 379 380 381 382 383 384 385 386 387 388 389 390 391 392 393 394 395 396 397 398 399 400 401 402 403 404 405 406 407 408 409 410 411 412 413 414 415 416 417 418 419 420 421 422 423 424 425 426 427 428 429 430 431 432 433 434 435 436 437 438 439