Book Title: Aagam Sambandhi Saahitya 04 Aagam Sootr Laghu Bruhat Vishayanukram
Author(s): Anandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Param Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
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आगम संबंधी साहित्य
नन्दी-आदि-सप्त-सूत्राणां-लघुबृहविषयानुक्रमौ
["उत्तराध्ययन ] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण पुन: संकलित: नन्दी-आदि-सूत्रस्य विषयानुक्रम: (आगम-संबंधी-साहित्य)
प्रत
सूत्रांक
यहां
लघुः विषयानुक्रमः
देखीए
दीप क्रमांक के लिए देखीए 'सवृत्तिक आगम
१०३२६* हुबपत्रकाध्वयनम् ३०९३४१२४९४७७ प्रवचनमात्रध्ययनम् ४६३ ५२० ११३५९ बहुभुतपूजाध्यय० ११७३५३/२५९९१* यशीयाध्ययनम् ४८२५३१ १२४०५० हरिकेशीयाथ्यवनम् ३२७३७३२६१०४३ सामाचार्यध्ययनम् ४८९५४७
१३४४००चित्रसंभूतीयाध्ययनम् ३५७३९७२७१०६०%खलहीयाध्ययनम् ४२८५५४ ७ अथोत्तराध्यनानि १४४९३* इषुकारीयाध्ययनम् ३७२४११०
२८१०९६*मोक्षमार्गाध्ययनम् ५०५५६९ १४००विनवाव्ययनम्
२९८८ सू. सम्यक्त्वपराक्रमा०५१३५९८ ६४ १६/१५५०९० सभिक्षुकाध्ययनम् ३७९४२० २९४७ परीचहाच्यवनम् १सू.१४१ १३९ १६५२६* प्रमचर्यसमा०१०॥३८५४३०१
३०११३४ तपोमार्गाध्यवनम् ५१६६१०
४१०३१११५५४ चरणविध्यध्ययनम् ५२१६१८ ३११४० चतुरजीयाध्यय०१-८-२-१८८१७५४७७ पापभमणाध्ययनम् ३९०४३६१
३२१२६६*प्रमावस्थानाध्ययनम् ५२९६३९ ४ १२७० संस्कृताध्ययनम् २०७२२७१८६००% संवतीयाध्ययनम् ४०४४५०,
पन २०० ८ २००७ सपनायायवनम् ४०४४५०३३१२९१ कर्मप्रकृत्यध्ययनम् ५३६६४८ ५१५१०मकाममरणाण्ययनम्न३५२५४१९६९८७ मृगापुत्रीयाध्ययनम् ४२१४६६०
१२६/३४ १३५२ श्याध्ययनम् ५४५६६२ ६१७वकनिर्मन्बी०२४३-२०-२७०/२०७५८० महानिन्धी०४२८-४५-४८१३५१३७७७अनमारमार्गाच्य० ५५१६६८ ७२०४ औरभ्रिकाध्ययनम् २४९२८५/२१७८२७ समुद्रपालीयाम्य० ४४२४८८१६१४जीवाजीववि० ५६२ ७१३ | ८२२७० कापिलीयान्वयनम् २१९२९७२२८३१रयनेमीयाध्ययनम् ४५०४९० ९२८९० नमित्रम्याध्ययनम् २७९३२०२३ ९२०० शिगौवमीवाय० ४५७५१२ इति उचराध्ययनानि
सुत्ताणि
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