Book Title: Aagam Sambandhi Saahitya 04 Aagam Sootr Laghu Bruhat Vishayanukram
Author(s): Anandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Param Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
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आगम संबंधी साहित्य
[भाग-4] उपांग-सूत्र-लघुबृहविषयानुक्रमौ
[ उपांगसूत्र-७ “जंबूद्वीपप्रज्ञप्ति"1 पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण पुन: संकलित: उपांग+प्रकीर्णक-सूत्रस्य विषयानुक्रमः (आगम-संबंधी-साहित्य)
प्रत
सूत्रांक
यहां देखीए
५००विषयसूचिः
दीप क्रमांक के लिए देखीए
श्री उपांगादि१३५ दिनरात्रिमानम् ४४९/१४८ चंन्द्रमण्डलायामादि। ४६८ १६०, १०४-११०* नक्षत्रगोत्रसंस्थाने ।
जम्बूद्वीप विषयानुक्रमे
१३६, ८४* तापक्षेत्रमानम् । ४५३:१४९ चन्द्रमुहूर्तगतिः। ४७० ॥ ७७॥ १३७ दूरादिदर्शनम् । ४५८ १५० नक्षत्रमण्डलादि। ४७४ १६१, १११-११८ नक्षत्रचन्द्रसूर्य१३८क्षेत्रगमादिः।
१५. सूर्यादेरीशान्यादावुद्गमादिः । ४७१ योगकालः । १३९ क्रियाः।
१५२, ८५-९० संवत्सरभेदाः। ४८५ १६२, ११९ कुलादिपूर्णिमामावास्याः। १४. उर्धादितापः। २ १५३, ९१-९९* संवत्सरेषु पंचसु मास
५०४ | १४१ ऊर्बोत्पन्नत्वादि।
पक्षादिनामानि । ४९० १६३, १२० माससमापकनक्षत्रवृन्दम् । S१४२ असूर्य स्थितिः विरहादि च। | १५४ करणाधिकारः ।
४६३ १५५ संवत्सरायधिकारः। ४९४ १६४, १२१-१२२७ अणुत्वादि । ५२१ १४३ चन्द्रस्य मण्डलम् । ४६४ १५३, १००* नक्षत्राधिकारः। ४९५/ १६५ परिवारः । १४४, क्षेत्रम् ।
१५७, १०१. दक्षिणादियोगाधिकारः।।१६६ अवाधाः। १४५ चंन्द्रयोरवाधाः।
४९६ १६७, १२३-१२५* अभ्यन्तरसंस्थान१४६ चंद्रस्यायामः। , १५८ नक्षत्रदेवाः।
४९८ विस्तारादि।
५२४ १४७ चन्द्रमण्डलाबाधा। ४६६ १५९, १०२-१०३ ताराणां संख्या।,, | १६८, १२६-१२७* चन्द्रादिविमान
IS.७७11
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'सवृत्तिक आगम
सुत्ताणि
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