Book Title: Nyayacharya Yashovijayji Krut Granthmala Author(s): Jain Dharm Prasarak Sabha Publisher: Jain Dharm Prasarak Sabha View full book textPage 8
________________ प्रस्ता वना ॥ ४॥ अ परीक्षा अने नयोपदेश ए चार पद्यबंध ले अने बाकीना पांच ग्रंथो (देवधर्मपरीक्षा, नयरहस्य, नयप्रदीप, जैनतर्क परि-|| नाषा, ज्ञानबिंड) गद्यबंध . आ दशे ग्रंथो बहुज उपयोगी . आ शिवाय आज ग्रंथकर्ताए बत्रीश बत्रीशी (धात्रिंशत् फात्रिंशिका) स्वोपाटीका सहित रचेली ते पण अमारा तरफथीज उपाववानुं शरु करवामां आवेखं बे. या ग्रंथकर्त्ताने लगभग बसें वर्ष श्रयां ने उतां तेमना ग्रंथोनो मोटो जाग अलन्य अझ पड्यो रे तेनु चोकस कारण कही शकातुं नथी तोपण जे कारण कट्पनामां आवी शक्युं ने ते श्रा साथे आपेला ए महापुरुषना जन्मचरित्रमा बताववामां आव्यु बे. एओना करेला ग्रंथोपैकी वर्तमानमा केटला ग्रंथो मळी शकेने अने केटलानां नाम जाणवामां आव्यां ने तेनुं लीस्ट तेमना चरित्रने अंते श्रापवामां आव्युं . ते उपरांत कोइ पण ग्रंथ लन्य के अलन्य कोइ पण मुनिमहाराजना जाणवामां होय तो ते साहेबे ते ग्रंथर्नु नाम विगरे अमने| लखी मोकलवा कृपा करवी के जेथी एवी हकीकतनो संग्रह करीने जैनवर्गना जाणवामां आवे तेम प्रगट करशुं. __ बाटली हकीकत रोशन करीने प्रस्तावनानुं लंबाण न करतां हवे पनी ते महापुरुषर्नु जन्मचरित्र तथा या ग्रंथमाळामां आवेला दशे ग्रंथोमां शुं शुं हकीकत समावेली ने ते संबंधी पन्यासजी श्रीश्राएंदसागरजी महाराजे खखावेलो उपोद्घात् आपवामां आव्यो रे ते तरफ लद आपवा वांचकवर्गने विनंति करीने प्रस्तावना समाप्त करवामां आवे जे. संवत् १९६५. ? श्रीजैनधर्मप्रसारक सजा. ' कार्तिकशुदि पूर्णिमा. भावनगर. ॥४॥Page Navigation
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