Book Title: Nyayacharya Yashovijayji Krut Granthmala
Author(s): Jain Dharm Prasarak Sabha
Publisher: Jain Dharm Prasarak Sabha

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Page 17
________________ गुजराती भाषामां करेली रचनाओ. १ श्रीपाळराजाना रासनो पाखो जाग. दिगपट चोराशी बोख (पद्यमां)३ जंबूस्वामीनो रास. ४ व्यगुणपर्याबनोरास ५ समाधिशतक.६समताशतक. ७ तत्त्वार्थनो टबो. ज्ञानसारनो टबो. ए जसविखास (पद ७५) १० आनंदघनजीनी स्तुतिरूप अष्टपदी. ११ सम्यक्शास्त्र विचारसार (पत्र). सझायो. | १ अढारपापस्थानकनी समाय. २ श्रादृष्टिनी सकाय. ३ प्रतिक्रमण गर्न हेतुनी सकाय.४ समकितना समसठ बोखनी सकाय. ए पांच कुगुरुनी सकाय. ६ अग्यार अंगनी सकाय. पांच महाव्रतनी जावनानी सझाय. अमृतवेखीनी सकाय ए संयमश्रेणीनी सकाय १० चार श्राहारनी सकाय. स्तवनो. | १ श्री सीमंधरस्वामीनी स्तुतिरूप ३५० गाथार्नु स्तवन. १ श्रीवीरस्तुतिरूप दुमी स्तवन (१५० गायानुं ). ३ सवासो || गाथा- स्तवन. ४ निश्चय व्यवहारतुं स्तवन (पांच ढाळर्नु) ५ मौन एकादशीना दोढसो कल्याणकर्नु स्तवन (१५ ढाळ-)| -- वर्तमान चोवीश तीर्थकरोनां स्तवनोनी चोवीशी ३ एविहरमान जिनस्तवन (वीशी). श्रा शिवाय कोइ पण ग्रंथ कोई पण मुनिमहाराजना के श्रावकनाश्ना जाणवामां होय अथवा जाणवामां आवे तो तेमणे अमने खखी मोकखवानी कृपा करवी.

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