Book Title: Aagam Sambandhi Saahitya 04 Aagam Sootr Laghu Bruhat Vishayanukram
Author(s): Anandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Param Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad

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Page 27
________________ आगम संबंधी साहित्य [भाग-4 ] अंगसूत्र-लघुबृहविषयानुक्रमौ [ अंगसूत्र-५. "भगवती"] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण पुन: संकलित: अंग-सूत्रस्य विषयानुक्रम: (आगम-संबंधी-साहित्य) प्रत भगवती लघुक्रमः।। सूत्रांक यहां देखीए ॥११॥ ७१२ ७ उद्देशः । ६७५ (७९१) ११ उद्देशः । ७०१ (८२३) | ५ उद्देशः । ७५१ (८९०) |८ , ।६८३ (७९३) १२, ७०४ (८३२) | ६ , । ७८६ । ९७७ (९०९) ९ , । ६८५ (७९५) १६ , । ७०८ (८३३) | ७, ८०५1१०७० (९२७) १०, । ६८८ (८००) | १९ , । ७११ (८३४) ८ , १८०६ (९२८) ६९१-८७ एकविंशतितमं शत (८४२) १म, 1८१० (,) कम् २१ ८०२ २१ , । ७१३ (८४६) ८१८-२०८७ पइविंशतितमं शतम् २६९३८ ॥ वर्गाः ८ उद्देशाः ८०॥ (.) २२ । ७१४ (८४७) १ उद्देशः। ८१५। १०८ (९३४) ६९२-८८ द्वाविंशतितमं शतकम् २२८०४, २३ । ७१५ (८४८) २ , 1८१६ (९२५) ६९३-८९३ त्रयोविंशतितमं शत २४ । । ७१६ | ३ , । ८१८ (९३८) कम् २३ ८०५ ८१९ सप्तविंशतितमं शतम् २७ ८१०-१०७ पञ्चविंशतितम शतम् २५ ९२८ ९३८ ७१६-९२६ चतुर्विंशतितमं शत ८२२ अष्टाविंशतितमं शतम् २८ ९४० १ उद्देशः । ७२० । ९३० (८५५) | ८२४ एकोनविंशतित्तमं शतम् २९ ९४२ १ उद्देशः । ६९८ ॥ ९२७ (८१७) | २ । ७२४ (८५८) |८२९ त्रिंशत्तमं शतम् ३० ९४८ (८२१) । ३ । ७३४ । ९४७ (८७२) | १ उद्देशः । ८२६ ३ , । ७०० (८२२) | ४ , ।७४६ (८८७) | ११, ।८२९ (९४८) दीप क्रमांक के लिए देखीए 'सवृत्तिक आगम (८५२) (९४७) सुत्ताणि ~27~

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