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________________ मुंहता नैणसीरी ख्यात वात फोज भागी तर कमालदी प्राय मूळराजसूं अरज की - "जु मिलक केसर, सराजदी, रांमस्या बीजा ही भला माणस कांम आया छै, तिणांरी लोथां दो जु मक्कै मेलां ।” तर मूळराज कह्यो–“लोथां द्यां नहीं, लोथां आगमें घात नै बाळसां' । बीजी लोथां स्याळ, जरख जिनावर खासी, पिण द्यां नहीं ।" तरै कमालदी कह्यो - "थे लोथां नहीं दो तो पातसाह मांहरी खाल पाड़सी । हूं इतरी अरज करूं छं जु लोथां पाऊं"।" दूहा- कप्पूरो मांगै भूत । ताबूत ॥ १ 1 2 17 नै मरहटो, मरहटो, भड़े उतारे भड़े साह कमालदी. कमालदी, केहररो मिलक कहै 'मूळा सरस, राय म' कर मन रोस । साहि आलम पड़ावसी, मूझ" सकांनी " पोस " ॥२ जड़-धड़' जरखां'' जंबकां 15, मिलक कमाल म- मग्ग 16 । पेस करै जे पातसा, केहर जाळिस अग्ग ? ॥३ तेरी माई पुत्र हूं, मेरा सुरतांण । बाप ! तूझ मो बाप मूळू कहै कमालदी, सत्र " न केहररो ताबूत लै, मैं मुसलमान कांधे बिहू, 20 मूळू नै कम्मालदी, बंधव हुवा ऊपाड़े नरवाहणां, आसी" सौ रारी व्रन्नां±4 चोळ" मुख, साह धखै जमदूत ॥७ तू है 18, मूळू जोय प्रमांण ॥४ 19 तोनूं 22 ताबूत 3 24 [ ४६ ऊतारं कोई देह | दीनेह ॥५ ताबूत । 21 जुगून ॥६ उनकी लाशें दो सो मक्के भेज दें । 2 लाशें नहीं दें, लाशोंको आागमें डाल कर जलायेंगे | 3 दूसरी लाशें भेड़िये जरख प्रादि जानवर खायेंगे, परन्तु देंगे नहीं । 4 तुम लाशें नहीं दोगे तो वादशाहं मेरी चमड़ी उतार देगा। 5 मैं इतनी प्रार्थना करता हूँ कि इनकी लाशें मुझे मिलें । 6 लाश, जनाजा । 7 मत, नहीं । 8 क्रोध । 9 उतरवायेगा, खिंचवायेगा । 10 मेरी । II सबकी 1 12 पोश, चमड़ी। 13 सिर और शरीर । 14 भेड़िये । 15 जंबुक, गीदड़ | 16 मत मांग। बाप है । 19 शत्रु । 20 दोनोंको | 21 दोनों 25 लाल । 17 श्रागमें जलाऊंगा । 18 तू मेरा 22 आयेंगे । 23 नेत्र । 24 वर्ण, रंग ।
SR No.010610
Book TitleMunhata Nainsiri Khyat Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBadriprasad Sakariya
PublisherRajasthan Prachyavidya Pratishthan Jodhpur
Publication Year1962
Total Pages369
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size19 MB
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