Book Title: Prakrit Vyakaranam Part 1
Author(s): Hemchandracharya, Ratanlal Sanghvi
Publisher: ZZZ Unknown
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। 'तानाम् ) जिनके हृदय में] अम्हेवयं वि. (अस्मदीयम्) हमारा; २१४९। 'विश्वास है, ऐसे निवासियों | अम्हेत्य सर्व ब. (ग्यमत्र) हम यहां पर;१-४. का; १-६.।
अयं पर्व. (अयम्) महा १-७३। अन्धलो वि. (अन्धः) अन्या; २-१७७।
अयि ब. (अपि) अरे । हे !; २-२१७ । अन्धो वि. (अध:) अन्धा; २-१७३ ।
अपि वि. ( अपितम् ) अपंग किया हखा; जॉट किया अन्नत्तो अ. (अन्यतः) अग्य रूप से; २-१६० ॥
हमा; १-६॥ 'अन्नत्य .अ. (अन्यत्र) अन्य स्थान पर; २-१५४।
उपिपम नि. (अस्ति) मर्पण किया गया; १-२६९ भन्नदो अ. (सम्वतः) दूसरे से दुसरी सफं२-१६० । मोप्पेह सक. (अपंयति ) वह अर्पण करता है। अन्नम्नं वि. (अन्योन्यम) परस्पर में आपस में १-१५६ अग्रह ब. (अन्यत्र) दूसरे स्थान पर १-२६१ ।।
ओपि वि. ( अर्पितम् ) मग किया हुआ; अन्नहि म. (अन्यत्र) दूसरे स्थान पर; २-१६१। अन्नारिसो वि. (अन्याशः) दूसरे के सा; १-१४१।। समपेतून क ( समषित्वा ) अर्पण करके 'अन्नभं चि. (अन्योम्यम्) परस्पर में आपस में; १-१५६/ २-१६४ । अप्पज्जो वि. ( आत्मज्ञः ) आत्म तत्व को जानने वाला | अरगणं न० (अरण्यम्) जंगल; १.६६ । अपने आपको जानने वाला; २-८३ ।
(आईन् ) जिन देव जैन-धर्म-उपदेशक अप्पणसं वि.(आत्मीयम् ) स्वकीयःको; निजीय को,
२.१११
अरहो पु. ( अईन ) जिनदेव; जिनसे कुछ भी बजेय अप्पर वि. (आत्मशः) अमत्म सस्य को जानने वाला;
नहीं है ऐसे देव, २-११। आत्म-ज्ञानी २-८३ ।
अरि पु. (अरि) दुश्मन, रिपुः ५-११७ । अप्पमस्तो वि. (अप्रमत्तः) अप्रमादी, सावधान उपयोग | अरिहन्तो पु. (बहनजिनेन भगवान, २-११। घाला, १.२३१।
अरिहा वि. (वहीं) योग्य; सायक; २-१०४। "अप्पा अप्पणो म. (स्वयम बाप, खुद, मिज २-१९७ | अरिहो पु. (बहन) जिनदेव; २-१११ ।
अहरो वि (अरुण: लाल; रक्तवर्षीया १.६1 अप्पाणो पु. (धारमा) आत्मा, जीध; २-५१ । । अरुहन्तो पु. (अर्डन) बिनदेव; २.१६ । अपुल्लं वि. (आत्मीय) आत्मा में उत्तपत्रः २-१६३ ।। | अरुहो पु. (अहंन्) जिनदेव २-११९ अमरिसो पु. (अमर्षः) असहिष्णुता २-१०५ ।
अरे अ. (अरे) अरे; सम्बोधक अव्यय शम्बर-२०१ अमुगो सर्व श्रमकः) वह कोई-अमक-दमक १-१७७ | अरिह सक. (अर्हति) मा के योग्य अमुणन्ती बकृ. (अजानन्ती) नहीं जानती हुई: २-१९० अलचपुर न. (अचलपुरम्) एक थोष का नाम; ३.११८
अम्ब न. (आम्रप) आम्र-फल; १८४२-५६ । अलसी स्त्रो. (जतमी) तेल बाला तिश्न विशेष ; अम्बिर । देशज) न. (आम्र-फलम्) आम्रफल: २-५६ । अम्बिल वि. (आम्लम्) सट्टा; २-१०६ ।
अलाउं न, (अनाम्) तुम्डीफल; १-६६ । श्रम्मो अ. (आश्चर्षे) आश्चयं अर्थ में प्रयुक्त किया । अलाऊ स्त्री. अलावूः) तुम्बी सता; १-६६ । आता है; २२०८.
अलावू स्त्री. (अलाबूः) तुम्मी-छता (-२३७ । अम्ह अम्ह (अस्माका) हमारा;१-३३, २४६, २-२०४अलाह अ. ( निवारण-अ) निवारण-मनाई' करने अम्हरो सर्व. (अस्मदीयः) हमारा; २-१४७
अर्थ में; २-१८९॥ श्रम्हकेरं सर्व. (अस्मदीयम्) हमागा; २.९९। अलिश्र, अली न. (अलोकम् । मषावाद (वि.) अम्हे वं. घयम्) हम; ..४०;
मिथ्या खोटा; १-१.. अम्हारिसो वि. (अस्माहशः) हमारे जैसा; (-१४२; २-७४ | अल्लं कि. (आर्द्रम् ) गीता, भाषा हु। १-८२ |

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