________________ ८/वर्णक्रम-सूक्ति-पञ्चाशिका 21. ङ- ङ-वगेर मुखे नासा-बडे उच्चार पामता। पांचे क्यारेक देखाए, एवी बेघरनी दशा // 22. च- चक्र एकथी भानुनो, रथ पामे दिगंतने / विशिष्ट व्यक्तिओ माटे, नियमो होय न्होय वा // 23. छ- छत्री तापथी रक्षे छ, भारथी श्रम हाथने / वस्तु निमित्त छे कोना, सर्वथा सुख-दुःखनुं / / 24. ज- जगत् आश्चर्यकारी छ, वस्तुनी तो नवाई / सोमां पचास आवे ए वात लागे नवी नहीं // 25. झ- झंकार भमरो गुंजे, पीने मधु परागर्नु / प्राणीओ तुच्छ सामान्ये, स्वार्थमा मिष्ट बोलता // 26. ञ ञनो उच्चार छ क्लिष्ट, शब्दारंभे वधू वळी। अंतमां होय ते वक्र, सदाये विश्वमां दीसे // 27. ट- टंकार शिवनो वाची, वर्ण विख्यात छ जगे। तेम बीजा बधा वर्णो, देवता वर्णरूप छे॥ 28. ठ- ठं ठं ध्वनि घटे थाए, दादरे दडतो रहे / रीति पगथियानी ए, मूंगा ए रही ना शके // 29. ड- डगलां गगने मांडे, पक्षी बे पांखथी यथा / ' ज्ञानने आत्मनी पांखे, जीव तेम थतो शिव // 30. ढ- ढ अक्षर सदा मूर्ख-माणसो मुखथी वदे। मूर्खा शुं शुं बगाडे ना, ढ ये मूर्ख गणाय छ / 31. ण- णकार प्राकृती भाषा, न स्थाने बहु गोठवे / प्राकृत पुरुषो प्राये, स्थान फेर कर्या करे // P.P.AC. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust