________________ ... गुजराती-अनुवाद/९ 32. त- तप नाश करे निश्चे, पापो भारे भले रह्या। .. / भेदाये वज्रथी सर्वे, अग्नि कोने न. बाळतो ? / / 33. थ- थू थू धू धू अने. फू फू करवू ए भलुं नहीं। .. ... एथी ना करवू सारू, सज्जनो समजे सही // 34. द- दाता तो स्वर्गमां जाए, पेसे पाताल संग्रही। . होये जो ए विषे शंका, जोइलो मेघ वारिधि // 35. ध- धर्म रक्षा करे तेनी, सेवे जे धर्मने सदा / . . सर्वत्र रीत आ रूडी, भक्त ने प्रभु पाळता // 36. न- नम्र पणे सदा रे वू, नम्रता विलसे घणुं / ना नमे नाशपामे ते, ताड.नेतरनी पडे // 37. प- परात्म तत्त्व ने पाये, प्रभावे परमात्मना। ., पारस मणिना स्पर्श, लोढं सोनुं बने खरे // 38. फ- फेण ऊंची करे सर्प, विषहीणो फरी फरी / / विण सामर्थ्य ना जीवो, राचे आडम्बरे मुधा // 39. ब- बोल आ हितकारी छे, सांभळी हृदये धरो। . किंपाक फूलशा अंते, विहवां रसने त्यजो॥ 40. भ- भवनी होय जो भीति, भाव चेतन भाववो। ... अर्हन् अभयना दाता, शुद्ध भाववडे थयां // 41. म- महा मोहतणो दारू, पीनारां भानने त्यजे / सत्य असत्यने माने, माने असत्य सत्यने / 42. य- यशस्वी दर्शनो जेनां, नथी शुं तस दर्शने / नेत्रहीणा नरो आगे, रूप दर्शन शुं फळे // P.P. Ac. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust