________________ .. गुजराती-अनुवाद/७ 10. लु- लु-समी दीर्घता धारे तेने को नव इच्छतुं। . . सन्मान इच्छनाराने दीर्घता वय॑ छे सदा // 11. ए- एक मात्र महा हो जो.गुण विश्वे प्रकाशतो / - कस्तूरी गंध मात्र थी विख्यात हरणे बन्यो // 12. ऐ- ऐन्द्र-वृन्द नमे तेने जे सदा इन्द्र ने भजे / ....... , जेवं वबाय छे बीज तेवं फल पमाय छे / 13. ओ- ओषधि बनतुं मूक मात्र योजक जो मळे / .. एकडानी पछी आव्ये मींडानी गणना थती // 14. औ- औन्नत्ये पामतो काले क्षुद्रे सरस होय तो! .. जुवानी आवता जेल. कामिनी स्तन वाधता // 15. अं- अं-अनुस्वारना साथी-विद्वानो वदता खरे / . बिन्दुरूपे रहे तेओ स्वरो पाछळ जे पड़े // श्रद्धाथी स्वरने वों श्रद्धा कार्य खरे करे / 17. क- कर्म केराज सामर्थ्य दुःखी एक सुखी बीजो / भाग्ये शंकर ने भस्म-ने लक्ष्मी विष्णुने मळे / 18. ख- खल साथे कदी दोस्ती धीमाने करवी नही। . .: मध्यमा आवता छाया पेठे अदृश्य एकता // 19. ग- गर्दभो जेम जे मूढो बलने वश वर्तता / .. 6 प्रहार दंडनो उग्र पामता ते पदे पदे // 20. घ- घर्षणे वधतुं तेज अतिघर्षणथी नहि। ... - घर्षणे वासणो शोभे अतिथी नाशपामतुं // P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust