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________________ १२१ द्वितीयो रागविवेकाध्यायः सधनीनी धनी नीध नीगागस सागासनी धनी सासा सासममसा मसगम धधा धाध मधानीनी धामामगा गमसास धानी नीध नीनीधध नीगागसा । सागां सनी धानी सासा-इत्यालापः। सममध धाधामंध धमामा(गान्धार)गसासासग मधधनी नीधामा। धामामध गागागस साससस गगसग मसगम धाधाधनी धधनीम मपधमा गससमस गसासाससनीधधनी धनीगागागसां ग धानी सासा-इति रूपकम् । इति प्रथमललिता। द्वितीयललिता भिन्नषड्जेऽपि ललिता ग्रहांशन्यासधैवता। रिगमैललितैस्तारमन्द्रेर्युक्ता धमन्द्रभाक् ।। १७६ ॥ प्रयोज्या ललिते लेहे मतङ्गमुनिसंमता । धाधाधाध सनी धाधाधध नीरी गासनीसा नीधाधाध सनी रीगामा । गरी मागा रीरीरीरीरीरी गमपधाधप नींधा पामा गारी । मागारी । रीगरीग मगमरी गामागारी धनी रीगासनी। धाधाधम धाधाधध नीरी रीधा नीरी धानी रीगा सनी सनी धाधाधध सरिग मगरि मामा बहुभिः । ऋषभपञ्चमहीना। द्वितीयललितां लक्षयति-भिन्नषड्जेऽपीति | ऋषभगान्धारमध्यमैः ललितैः किंचिद्वक्रितैस्तारमन्तैर्युक्ता । मन्द्रधैवता ॥ १७४-१७७॥ 16 Scanned by Gitarth Ganga Research Institute
SR No.034228
Book TitleSangit Ratnakar Part 02 Kalanidhi Sudhakara
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSarangdev, Kalinatha, Simhabhupala
PublisherAdyar Library
Publication Year1959
Total Pages454
LanguageSanskrit, English
ClassificationBook_Devnagari & Book_English
File Size201 MB
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