________________
ज्ञाता-द्रष्टा भाव (१) जीवन में कोई भी घटना घटित होती है, अज्ञानी उसको दिन-रात भोगता है। घटना हो या पदार्थ, उसे भोगने वाला भोक्ता कहलाता है। ज्ञानी व्यक्ति के जीवन में भी घटना घटित होती रहती है। वह उससे साक्षात् जानता-देखता है, पर उससे प्रभावित नहीं होता। वह ज्ञाता-द्रष्टा है, पर भोक्ता नहीं है।
अध्यात्म का उद्देश्य है भोक्ता को ज्ञाता-द्रष्टा बनाना। यह अज्ञानी से ज्ञानी बनने की यात्रा है।
अज्ञानी जन भोगता, घटना को दिन रात। ज्ञानी केवल जानता, घटना को साक्षात्।।
अध्यात्म पदावली ४८
७ मार्च २००६