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________________ 离岛岛圈圈瑚岛离岛岛岛离岛圈圈圈圈圈圈圈 १) २) ३) गुरुवार क्यारे प्रभु तुज स्मरणथी आंखो थकी अश्रु सरे, क्यारे प्रभु तुज नामवदता हैयुं मुज गद्गद् बने; क्यारे प्रभु तुज नामश्रवणे देह रोमांचीत बने, क्यारे प्रभु मुज श्वासे श्वासे नाम तारूं संस्मरे ॥ करूणा तणा तुज मानसरमां हंस बनीने हुं रहूं अगणित गुणोना मोती साचा, ते ज हुं निशदिन चरूं, राग जेवा पापना पडछाया पण हुं परिहरूं, प्रभु आपना सानिध्य मां मुज आतमा पावन करूं ॥ मारा जीवनना जीगर वहाला दिलडाना देव तुं, अंतरयामी आ हृदयनो प्राण प्यारो एक तुं, श्वासे श्वासे स्मरण तारूं, रोम रोम भक्तिभरी, तारा प्रेमनी पूजाभरेली, जिंदगी छे माहरी ॥ शुक्रवार १) श्री ऋषभ प्रभुनुं मुखडुं जोइ मनमयूर नाची उठे, भवोभवतणा पातिक बधा क्षणवारमां दूरे हठे; धन्य धन्य दिवस धन्य धन्य घडी, अमृततणा मेहुला वुठे, श्री नाभिनंदन ऋषभजिनवर आज मुज उपर त्रुठे... ।। 圈圈圈圈圈圈圈廟廟 •瑚岛岛囧囧囧囧囧图
SR No.032214
Book TitleSurendra Bhakti Sudha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPiyushbhadravijay, Jyotipurnashreeji, Muktipurnashreeji
PublisherShatrunjay Temple Trust
Publication Year2003
Total Pages68
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size7 MB
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