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________________ २४१ किरोलय-किसर संक्षिप्त प्राकृत-हिन्दी कोष किरोलय न [किरोलक] फल-विशेष, किरो- | किलिम्म देखो किलम्म । लिका वल्ली का फल । किलिम्मिअ वि [दे] कथित । किल देखो किर = किल । किलिव देखो कीव । किलंत वि [क्लान्त] खिन्न, श्रान्त ।। किलिस अक [क्लिश्] थक जाना, दुःखी किलंज न [किलिञ्ज] बाँस का एक पात्र, होना। जिसमें गैया वगैरह को खाना खिलाया जाता किलिस देखो किलेस। है। तृण-विशेष । किलिस्स देखो किलिस - क्लिश् । किलकिल अक [किलकिलाय] 'किलकिल' किलीण देखो किलिन्न । आवाज करना, हँसना । किलीव देखो कीव । किलणी स्त्री [दे] रथ्या, गली। | किलेस अक [क्लिश्] क्लेश पाना, हैरान किलम्म अक [क्लम्] क्लान्त होना, खिन्न होना। होना । किलेस पुं [क्लेश] खेद, थकावट । दुःख, किलाचक्क न [क्रीडाचक्र] इस नाम का एक पीड़ा, बाधा । दुःख का कारण । कर्म, शुभाछन्द । शुभ-कर्म । °यर वि [कर क्लेशजनक । किलाड पु [किलाट] दूध का विकार-विशेष | किल्ला देखो किड्डा । मलाई। | किव पुंशकृप] कृपाचार्य । किलाम सक [क्लमय] क्लान्त करना, खिन्न किवं (अप) देखो कह। करना, ग्लानि उत्पन्न करना । हैरान करना । किवण वि [कृपण] गरीब । निर्धन । कंजूस । पीड़ा करना । कवक किलामीअमाण । कायर। किलिंच न [दे] छोटी लकड़ी का टुकड़ा। किवा स्त्री [कृपा] दया, मेहरबानी । °वन्न किलिंचिअ न [दे] ऊपर देखो। वि [पत्र] कृपा-प्राप्त, दयालु । किलित देखो किलंत। किवाण पुंन [कृपाण] खड्ग । किलिकिच अक [रम्] रमण करना, क्रीड़ा | किवालु वि [कृपालु] दयालु । करना। किविड न [दे] खलिहान, अन्न साफ करने का किलिकिल अक [किलकिलाय] 'किल-किल' | स्थान । वि. खलिहान में जो हुआ हो वह । आवाज करना। किविडी स्त्री [दे] किवाड़, पार्श्व-द्वार । घर किलिकिलि न [किलकिलि] इस नाम का का पिछला आँगन । एक विद्याधरनगर। किविण देखो किवण। किलि किलिकिल देखो किलकिल। किवोडजोणि पुं [कृपीटयोनि] अग्नि । किलिगिलिय न [किलिकिलित] 'किल-किल' किस सक [क्रशय] अपचित करना । आवाज करना, हर्ष-द्योतक ध्वनि-विशेष ।। किस वि [कृश] निर्बल । पतला । किलिट्ठ वि [क्लिष्ट] क्लेश-युक्त। कठिन किसंग वि [कृशाङ्ग] दुर्बल शरीरवाला। विषम । क्लेश-जनक ।। किसर पुं कृशर] पक्वान्न-विशेष, तिल, किलिण्ण देखो किलिन्न । चावल और दूध की बनी हुई एक खाद्य किलित्त वि [क्लप्त] कल्पित, रचित । चीज । खिचड़ी। किलिन्न वि [क्लिन्न] आई । किसर देखो केसर। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.016020
Book TitlePrakrit Hindi kosha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorK R Chandra
PublisherPrakrit Jain Vidya Vikas Fund Ahmedabad
Publication Year1987
Total Pages910
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationDictionary & Dictionary
File Size19 MB
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