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________________ () पांच रंगना थाय , एने कुंथुश्रा पण कहे . (गंगालिय केय) गोपालिक, ए एक जातिना एवाज' जीव थाय ने, ते अप्रसिद्ध बे. (इलिया के0) शलिका, ए जीव खांस अथवा चोखासा उत्पन्न थाय (दगोवाई के) इंगोपादि, ए जीव वर्षातुसां वरसाद पडे त्यारे उत्पन्न थाय बे, एनो अत्यंत रक्त वर्ण होय , एने लोकमां मेहना लामा पण कहे . इत्यादिक ( तेइंदिय के) तेइजिय' जीवो वीजा पण घणा ले ते सर्व जाणी लेवा. ए तेजिय जीवोने स्पर्शनेडिय अने रसनेलिय तथाः घ्राणेंजिय ए त्रण इंजियो होय जे. एम ए तेइंजिय जीवोना लेद कह्या ॥ १७ ॥ हवे चौरिंजिय जीवोना नेद कहे :चरिंदिया य विचू, टिंकुण नसरा य नमरिया तिडा ॥ मचिय मंसा मसगा, कंसारी कविल मोलाई ॥ १७ ॥ गाथा १७ मीना बूटा शब्दना अर्थ.. चलरिदिया चौरिंजिय. टिंकुणबगाइ. . . . विवी , . . . नमरा-भ्रमर, . . . .
SR No.010850
Book TitleJiva Vichar Prakaran
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Bhimsinh Manek
PublisherShravak Bhimsinh Manek
Publication Year
Total Pages97
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size4 MB
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