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________________ [ ३७ ] तारहा (२६) तेरा। तिखराव (५९) तक्षकराज तारा (६७)-तव, तुझसे। कालीदह के नाग के लिए तारा (४४)-वानर राज वालि की प्रयोग किया है। स्त्री, अंगद की माता, वृह-तिण (५२, ५३, ६६)-उस । स्पती की दो स्त्रियो मे से | तिणि (३६, ४६, ८२)-उस । दूसरी। तिणिना (१००)-उसको। तारिन (३०)-तार करके। तिणी (६, ५)-की। तारिया (१८)-उद्धार किये, पार तिणे (१४, ३१, ८७)—के, की। उतार दिए। तिना (२६)-तुझको। तारी (५२)-उद्धार किया। तिम (७०)-तमे। तारै (४६, ६८)-उद्धार करता है। तिमि (२०)-तैसे। ताळो (७०)-ताला। तास (६३, ६६)-उसके, संकट, पीडा | तिल' (४६)-तिल, जिसका तेल ताह (३८)-उन । निकाला जाता है। ताहरा (१०३)--तव, उस समय। तिलोइ (३६)-तिल मात्र की। ताहरा (२०, २६, २८, ३६, ६८)- तिलोई (१०)-तिल मात्र । तेरे तेरा। तिसर (५६)-त्रिशरासुर, एक दैत्य । ताहरी (२६, ३६, ४६)-तेरी। तीकम (8)-त्रिविक्रम, वामना वतार ताहरे (५०) तेरे। का एक नाम, विष्णु का एक ताहरै (४२, ५०, ७७, ६०) तेरे । नाम। ताहरौ (१५, २५, २६, २७, ३७; | | तु (४२, ४७)-तू । ६४) तेरा। तिहुँ (१५)-तीनो। | तु ड (९१)-मस्तक, शिर । तिका (५१, ६८)-उन्हें, उनको। तुंवर (२५, ५९) इकतारा, किन्नर । तिका (६६)—वह। तु सा (१६, ५६, ८०) तुझमे । तिके (२, १०२)-वे। तुंहार (७६) तेरे। तिक (५२, ७१, ७८, ६३)उस, वे। तुनां (५८, ७५,७६, ८८)-तुझको। तिको (४२)-वह। | तुझ (१६, ३८)-तेरे, तेरी ।
SR No.010757
Book TitlePirdan Lalas Granthavali
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAgarchand Nahta
PublisherSadul Rajasthani Research Institute Bikaner
Publication Year
Total Pages247
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size6 MB
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