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________________ ३६ ] ___ मुंहता नैणसीरी ख्यात कोहर छै । त, अरजुननें कह्यो “अटै वडो पांणीरो कुंड तळसीर छ । ओ वचन छै ।" नै ईसे कह्यो-"उठे म्हारी डोहळी, कपूरदेसरी पाळ हेठे, तिण कपूरदेसर माह सिला १ लंबी फलांणी ठोड़ छै, सु थे उठ जाय, वा सिला उथळ देखो, उण बांस लिखियो छै सु करीजो' । उठै वडो गढ हुसी । लंकारै आकार तिखूगो करज्यो । थांहरै घणी पीढी रहसी। वडो अगजीत दुरंग हुसी ।" पछ जेसळ कारीगरां सारांनूं ले ॐ प्रायो। सिला वताई थी सु उलट दीठी । उण हे लिखत नीसरियो - दूहो- "लुद्रवा हूंती ऊगमण, पांचै कोसै मांम । ऊपाड़े प्रो मंडज्यो, तिण रह अम्मर नाम ॥१ . वात - वा वांभण ईसारै कहै रावळ जेसळ कपूरदेसररी पाळ कनै रडीसी थी उण कुंडरा पांणो ऊपर संमत १२१२रा सांवण वद १२ अादीतवार मूळ नखत्र रावळ जेसळ जेसळमेररी रांग'' मंडाई । थोड़ो-सो कोट, आथवण दिसली प्रोळ तयार हुई । वरस ५ पछ रावळ जेसळ काळ कियो । पाट रावळ सालवाहन जेसळरो बैठो। अांक २। रावळ सालवाहन जेसळरो । जेसळ पछै जेसलमेर पाट वैठो। सालवाहण निपट वडो ठाकुर हुवो । जेसळमेररो गढ जेसळ मंडायो थो पण गढ, मोहल, प्रोळ कोहर सारो काम सालवाहण करायो । जेसळमेर. सालबाहण वडो करमप्रसाद धणी हुवो । घणी धरती नवी ___[ और उसमें जेसलू नामका मुख्य और बड़ा कूप है। 2 तल-स्रोत वाला। जिसमें तल-स्रोतका अपार पानी हो । 3 दान में दी हुई भूमि । 4 अमुक । 5 उसके पीछे जो लिखा हुया है उसके अनुसार करना। 6 लंकाके त्रिकोण गड़के आकारमें बनवाना। 7 किसीसे . नहीं जीता जाने वाला वह दुर्ग होगा। 8 जिसको स्थल करके देखा। 9 उसके नीचे यह लिखा हुआ निकला। 10 लुद्रवासे पांच कोस पूर्व दिशामें जो स्थान है उसके पास यह गढ़ बनवाना, जिससे नाम अमर हो जायगा। II पथरीली ऊंची भूमि । 12 नींव । 13 पश्चिम दिशा वाली। ' 14 जैसलमेरका गढ जेसलने बनवाना शुरू किया था किन्तुगढ़, महल, पोल ... और कुएं प्रादि दूसरा सारा काम शालिवाहनने बनवाया था। IS भाग्यशाली।।
SR No.010610
Book TitleMunhata Nainsiri Khyat Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBadriprasad Sakariya
PublisherRajasthan Prachyavidya Pratishthan Jodhpur
Publication Year1962
Total Pages369
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size19 MB
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