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________________ .. ___ मुंहता नैणसीरी ख्यात १ पुंगळिया। . सेखासर' । १. वैरसल पुरिया । रावळ राजरा पोतरा१ किसनावत । १ उरजनोत । १ खींवा । १ हमीर । १ नेतावत रिणमलरा रांणा रतनसीरा पोतरापोतरा। १ ऊंनड़। १ खरड़वाळा केलण । १ कीता गोगली। १ अकै केलणोतरा पोतरा सोमसीरा पोतरा। वात भाटियारी # सोमवंसी, एकादसमें तीसमें अध्यायमें जादवस्थलमें इतरा जादवांरा वंस कह्या । प्रभासक्षेत्र श्रीकृष्णजी नावै बैस पधारिया समुद्र मांहै । सरस्वती नदी प्रभासखेत्र छ, तिणरो महातम कह्यो छै। विगत १ दसार्क । . १ विष्ण। १ अंधक। १ भोज । १ सत्वात । १ मधु । १ अर्बुद। १ माथुर । १ सूरसेन । १ कुंत । १ विसरजन । १ कुकर। अथ जैसळमेररै देसरी हकीकत वीठळदास लिखाई - जैसळमेरथी खडाळरो छेह कोस १० कणवण देवड़ावाळो । नै' पैलो छेह तांणुकोट जैसळमेरथी' कोस ४०, कोर डूंगररां कोस ५०, तिणमें अतरा11 गांव खडाळमें छै । ___I केलणका बेटा अकाके पोते शेखासरमें। 2 ये भाटी सोमवंशी कहलाते हैं। महाभारतके एकादश और तीसवें अध्यायमें यादवस्थलीके वर्णनमें यादवोंके इतने वंश कहे हैं । . 3,4 उसमें प्रभासक्षेत्र, श्रीकृष्णजी नावमें वैठ कर समुद्र में पधारे और सरस्वती नदी जो प्रभास क्षेत्रमें है-उन सवका महात्म्य उसमें कहा गया है। 5 जैसलमेर देशका वृत्तान्त जो विट्ठल दासने लिखाया। 6 किनारा, सीमा । 7 और । 8 दूसरा, आगेका। 9 से । 10 जिसमें । ___ II इतने ।
SR No.010610
Book TitleMunhata Nainsiri Khyat Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBadriprasad Sakariya
PublisherRajasthan Prachyavidya Pratishthan Jodhpur
Publication Year1962
Total Pages369
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size19 MB
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