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________________ ७९२ सुत्तागमे [भगवई गोयमा ! अणेगा अभिवयणा प०, तं०-अवम्मेइ वा अधम्मत्थिकाएइ वा पाणाइवाएइ वा जाब मिच्छादसणसल्लेइ वा इरियाअसमिईइ वा जाव उच्चारपासवण जाव पारिट्ठावणियाअसमिईइ वा मणअगुत्तीइ वा वइअगुत्तीइ वा कायअगुत्तीइ वा जे यावन्ने तहप्पगारा सव्वे ते अहम्मत्यिकायस्स अभिवयणा, आगास स्थिकायस्स णं पुच्छा, गोयमा ! अणेगा अभिवयणा प०, तं०-आगासेइ वा आगासस्थिकाएइ वा गगणेइ वा नभेइ वा समेइ वा विसमेइ वा खहेइ वा विहेइ वा वीईइ वा विवरेइ वा अंबरेड वा अंबरसेइ वा छिड्डेइ वा झुसिरेइ वा मग्गेइ वा विमुहेइ वा अ(है)द्देइ वा विय(ह)द्देइ वा आधारेइ वा वोमेइ वा भायणेइ वा अंतरिक्खेइ वा सामेइ वा उवासंतरेइ वा अगमेइ वा फलिहेइ वा अणंतेइ वा जे यावन्ने तहाप्पगारा सव्वे ते आगासत्थिकायस्स अभिवयणा प०। जीवत्थिकायस्स णं भंते ! केवइया अभिवयणा प० ? गोयमा ! अणेगा अभिवयणा प०, तं०-जीवेइ वा जीवत्यिकाएइ वा पाणेइ वा भूएइ वा सत्तेइ वा विनइ वा चेयाइ वा जेयाइ वा आयाइ वा रंगणेइ वा हिंडएइ वा पोग्गलेइ वा माणवेइ वा कत्ताइ वा विकत्ताइ वा जएइ वा जंतूइ वा जोणीइ वा सयंभूइ वा ससरीरीइ वा नायएइ वा अंतरप्पाइ वा जे यावन्ने तहप्पगारा सव्वे ते जीवअभिवयणा प० । पोग्गलत्थिकायस्स णं भंते ! पुच्छा, गोयमा ! अणेगा अभिवयणा प०, तं०-पोग्गलेइ वा पोग्गलत्थिकाएइ वा परमाणुपोग्गलेइ वा दुपएसिएइ वा तिपएसिएइ वा जाव असंखेजपएसिएइ वा अगंतपएसिएइ वा (खंधे ) जे.यावन्ने तहप्पगारा सत्वे ते पोग्गलत्थिकायस्स अभिवयणा प० । सेवं भंते ! २ त्ति ॥ ६६३ ॥ वीसइमस्स सयरस वीओ उद्देलो लमत्तो॥ ___ अह भंते ! पाणाइवाए मुसावाए जाव मिच्छादसणसल्ले, पाणाइवायवेरमणे जाव मिच्छादसणसल्लविवेगे, उप्पत्तिया जाव पारिणामिया, उग्गहे जाव धारणा, उट्ठाणे कम्मे वले वीरिए पुरिसक्कारपरक्कमे, नेरइयत्ते असुरकुमारत्ते जाव वेमाणियत्ते, नाणावरणिजे जाव अंतराइए, कण्हलेस्सा जाव सुक्कलेस्सा, सम्मद्दिट्टी ३, चक्खुदंसणे ४, आभिणिबोहियणाणे जाव विभंगनाणे, आहारसन्ना ४, ओरालियसरीरे ५, सणजोगे ३, सागारोवओगे अणागारोवओगे जे यावन्ने तहप्पगारा सव्वे ते णपणत्य आयाए परिणमंति ? हंता गोयमा ! पाणाइवाए जाव सव्वे ते णण्णत्थ आयाए परिणमंति ॥ ६६४ ॥ जीवे णं भंते ! गन्भं वक्कममाणे कइवन्नं कइगंध एवं जहा वारसमसए पंचमुद्देसए जाव कम्मओ णं जए णो अकम्मओ विभत्तिभावं परिणमइ । सेवं भंते ! २ त्ति जाव विहरइ ॥ ६६५ ॥ वीसइमे संए तइओ उद्देसो समत्तो॥ कइविहे णं भंते ! इंदियउवचए पन्नत्ते ? गोयमा ! पंचविहे इंदियउवचए प०,
SR No.010590
Book TitleSuttagame 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorFulchand Maharaj
PublisherSutragam Prakashan Samiti
Publication Year
Total Pages1314
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, agam_acharang, agam_sutrakritang, agam_sthanang, agam_samvayang, agam_bhagwati, agam_gyatadharmkatha, agam_upasakdasha, agam_antkrutdasha, & agam_anutta
File Size89 MB
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