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________________ ५६ धरम संघ री थरपणा : ___ मध्यम पावा री पैली धरम सभा मांय ईज इग्यारे बड़ा वडा विद्वान अर उरणारा चार हजार चार सौ शिष्य, भगवान महावीर रै कनै प्रवजित हुया। आ एक बडी इचरजकारी घटना ही। इण भांत भगवान महावीर र उपदेसा सूप्रभावित हुयर कई राजा-महाराजा, सेठ-साहूकार, अर वोजा घणाई लोग-लुगाई महावीर रा शिष्य वरिणया। भगवान मिनखां नै थ न धर्म पर चारित्र धर्म री सीख देयर साधु. साध्वी पर श्रावक-श्राविका रूप चतुर्विध संघ री थरपणा करी । इण व्यवस्था नै प्रभु दो भागों में बांटी। एक पूरो त्यागी वर्ग अर दूजो आंशिक त्यागी वर्ग । पूरो त्याग करणिया साधु अर साध्वियां रो न्यारो-न्यारो सघ बगायो । इपीज भांत आंशिक त्यागियां मांय भी श्रावक अर श्राविका रो न्यारो-न्यारो संघ कायम कियो। घरवार छोड़'र पांच महावतां रा पाळण करणिया नर-नारी श्रमण पर श्रमरणी कैवाया पर गृहस्थी में रैयर वारा अणुव्रतां रा पाळण करणिया नर-नारी श्रावक अर श्राविका रै रूप मे भगवान रै धर्म संघ में भेळा इया। श्रमण संघ री शिक्षा-दीक्षा, व्यवस्था अर अनुशासन री देखभाळ रो भार गणधरां रै जिम्मै रहियो । श्रमणी संघ रो भार आर्या चंदणा नै सूप्यो गयो । वा छतीस हजार साध्वियां री प्रमुख ही। महावीर र धर्म शासन में जाति, पद, अधिकार या उमर सू कोई साधु वड़ो नी मानीजतो । उरण रै बड़प्पन रो कारण उरण री साधना मानीजती । महावीर रै श्रमण संच मे राजा, राजकुमार, ब्राह्मण, बारिणया, सूद्र, चांडाळ आदि सगळी जातियां रा लोग भेळा हा। संघ में सवरै सागै समता रो व्यवहार हो । जात-पांत सूकोई ऊंचो-नीचो नो मान्यो जावतो।
SR No.010416
Book TitleMahavira ri Olkhan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHansraj Baccharaj Nahta
PublisherAnupam Prakashan
Publication Year
Total Pages179
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size6 MB
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