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________________ ( १२१ ) प्रश्न ७३–दश गुणस्थान में कितने भाव होते हैं ? उत्तर-(१) क्षायिक सम्यग्दृष्टि जीव हैं तो औपशमिक भाव को छोडकर चार भाव है। (२) यदि द्वितीयोपशम सम्यग्दृष्टि जीव है तो क्षायिक भाव को छोडकर चार भाव है। प्रश्न ७४-८ वें और वें गुणस्थान में कितने भाव होते हैं ? उत्तर-(१) यदि क्षायिक सम्यग्दृष्टि जीव है औपशमिक भाव को छोडकर चार भाव है। (२) यदि द्वितीयोपशम सम्यग्दृष्टि जीव है तो क्षायिक भाव को छोडकर चार भाव हैं। प्रश्न ७५--सातवें गुणस्थान मे कितने भाव होते हैं ? उत्तर-(१) क्षायिक सम्यग्दृष्टि को तो पारिणामिक भाव, क्षायोपशमिक भाव, औदयिक भाव, क्षायिक भाव ये चार भाव होते है। (२) औपशमिक सम्यग्दृष्टि हो तो क्षायिक भाव को छोडकर चार भाव होते है। (३) क्षयोपशम सम्यग्दृष्टि हो तो क्षायिक और औपशमिक को छोडकर तीन भाव होते हैं। प्रश्न ७६-छठे, पांचवें, चौथे गुणस्थान में कितने भाव होते हैं ? उत्तर-(१) क्षायिक सम्यग्दृष्टि हो तो औपशमिक भाव को छोडकर चार होते है। (२) औपशमिक सम्यग्दृष्टि हो तो क्षायिक भाव को छोडकर चार होते है। (३) क्षयोपशम सम्यग्दृष्टि हो तो क्षायिक भाव और औपशमिक भाव को छोडकर तीन भाव होते हैं। प्रश्न ७७-तीसरे गुणस्थान में कितने भाव होते हैं ? उत्तर--पारिणामिक, औदयिक और क्षायोपमिक भाव तीन होते हैं। प्रश्न ७८-दूसरे गुणस्थान में कितने भाव होते हैं ? उत्तर--पारिणामिक भाव, औदयिक भाव, क्षायोपशमिक भाव तथा दर्शनमोहनीय की अपेक्षा से पारिणामिक भाव इस प्रकार चार होते है। प्रश्न ७६-पहले गुणस्थान में कितने भाव होते हैं ?
SR No.010119
Book TitleJain Siddhant Pravesh Ratnamala 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Mumukshu Mandal Dehradun
PublisherDigambar Jain Mumukshu Mandal
Publication Year
Total Pages289
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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