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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir द्रष्टा दृश्यपणुं वरे, थाय पूजक पोते; रत्नचिन्तामणि हस्तमां, क्यां तुं परमां गोते.............मन० ५ दर्शन दुर्लभ ताहरां; विरला कोई पामे; बुद्धिसागर ध्यावतां, मळिया निश्चय ठामे. ..मन०६ सिद्धाचल तीर्थ स्तवन विमलाचल नितु वंदीए, कीजे एहनी सेवा. मानुं हाथ ए धर्मनो, शिव-तरु-फल लेवा. ...........विमला.१. उज्ज्वल जिन-गृह-मंडली, तिहां दीपे उत्तंगा. मानुं हिमगिर-विभ्रमे, आई अंबर-गंगा. ................विमला.२. कोइ अनेरुं जग नहीं, ए तीरथ तोले. एम श्रीमुख हरि आगले, श्री सीमन्धर बोले.........विमला.३. जे सघलां तीरथ कर्या, जात्रा-फल कहीए. तेहथी ए गिरि भेटतां, शत-गणुं फल लहीए.........विमला.४. जनम सफल होय तेहनो, जे ए गिरि वन्दे. सुजस विजय संपद लहे, ते नर चिर नन्दे.........विमला.५. सिद्धाचल तीर्थ स्तवन सिद्धाचल गिरि भेट्या रे, धन भाग्य हमारां. ए गिरिवरनो महिमा मोटो, कहेतां न आवे पारा; रायण-रूख समोसर्या स्वामी, पूरव नवाणुं वारा रे......धन.१ १७० For Private And Personal Use Only
SR No.008902
Book TitleJinandji Bhav Jal Par Utar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPadmaratnasagar
PublisherMahavir Jain Aradhana Kendra Koba
Publication Year2007
Total Pages292
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati & Worship
File Size7 MB
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