Book Title: Agam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Author(s): Amolakrushi Maharaj
Publisher: Raja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
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वउसेणं पुच्छा ? गोयमा ! जम्मणसंतिभावं पडुच्च कम्मभूमीए होजा णो अकस्मभूमीए होजा,साहरणं पडुच्च कम्मभूमीए होज्जा अकम्मभूमीए वा होजा एवं जाव सिणाए॥१२॥पुलाएणंभंते! किं ओसप्पिणी काले होज्जा उस्साप्पणीकाले होजा,णो ओस प्पिणी णो उस्सप्पिणीकाले होजा? गोयमा! ओसप्पिणी काले वा होजा,उस्सप्पिणी कालवा होजा, णो ओसप्पिणी णो उस्सप्पिणी कालेवा होजा ॥ जइ आसप्पिणी कालेवा होजा किं सुसम सुसमा काले होज्जा, सुसमा काले होजा, सुसमदुसमा काले होजा दुस्सम सुसमाकाले होजा, दुस्समा काले होजा, दुस्सम दुस्समा काले
होजा, ? गोयमा ! जम्मणं पडुच्च णो मुसम मुसमा काले होजा, णो भावार्थ
भूमि में होवे नहीं. और अकर्मभूमि में विहार करे नहीं. बकुश की पृच्छा, अहो गौतम ! जन्म विद्यमान भाव आश्री कर्मभूमि में होवे परंतु अकर्मभूमि में होवे नहीं साइरण आश्री कर्मभूमि व अकर्म भूमि में
होबे. ऐसे ही स्नातक पर्यंत कहना ॥ १२ ॥ अहो भगवन् ! पुलाक उत्सर्पिणी काल में होवे, अवसर्पिणी Eकाल में होवे या नो अबसर्पिणी नो उत्सपिणी काल में होवे ? अहो गौतम ! अवसर्पिणी काल में होवे.
* उत्सर्पिणी काल में हो नो अवसर्पिणी नो उत्सर्पिणी काल में होये, यदि अवमर्पिणी काल में होके तो .17 क्या सुषम सुषप काल में, सुषम, मुषमदुषम, दुषमसुषम, दुषम व दुषम दुषमं काल में होवे ? अहो
बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋषीजी
- प्रकाशक-राजाबहादुर लाला सुखदेवसहायजी ज्वाला प्रसादजी
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