________________ / श्रीगौतम-स्वामी-चरित्र पू. पं. आचार्य श्रीविजयधर्मधुरन्धर सूरिजी महाराजे रचेला स्तोत्रनो गुजराती - पद्यानुवाद छ जेनुं अद्भुत ने पवित्र वृत्त जगमांहे घj, वळी विघ्नवल्लि छेदवामां परशुसम जे सोहतुं / सघळा प्रशस्त प्रभावथी जे भविकज न मन मोहतुं, ते मंगलार्थे श्रीगुरुगौतमतणां पद-कज नमुं॥ 1 // वसुभूति द्विज गेहे थयो शुभजन्म जस सोहामणो, ने रत्नकुक्षिमात पृथ्वी नयन मन रळियामणो / जस नाम जगमा इन्द्रभूति देवमणिसम दोपतुं, ते मंगलार्थे श्रीगुरुगौतमतणां पदकज नमु // 2 // जे चौदे विद्या पारगामी वेदशास्त्र-विचक्षण, . अभ्यास क्रियाकाण्डनो करी कर्मकाण्डी विलक्षण / बन्या, नाम जेतुं विस्तषु चोमेर शशि ऊजलुं, ते मंगलार्थे श्रीगुरुगौतमतणां पदकज नमुं // 3 // नथी कोई मुज सम शास्त्रवेत्ता, वादी, वक्ता के कवि, शास्त्रो तणां जे मर्मने वळी गणता निर्मळ मति / अभिमान मिथ्या जेहना मनमां सदा आवं हतुं, ते मंगलार्थे श्रीगुरुगौतमतणां पदकज नमुं / / 4 / / सर्वज्ञ छु वळी वादीओने जीतनारो हुं ज छु, छे डोब बीजो मुज समो साक्षात् हुं सुरगुरु / इम चिन्तवी अभिमानशिखरे चित्त जस नित गाजतु, ते मंगलार्थे श्रीगुरुगौतमतणां पदकज नमुं // 5 // P.P.AC. GunratnasuriM.S. Jun Gun Aaradhak Trust