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________________ जयणंदिविरइयउ [८. ३४. ६घत्ता-महु लडहंग वणिवरिण एयइँ गंजियइँ पलोयहो। .. जाम ण मारइ ता मिलिवि अहो धावहु घावहुँ लोयही ॥३४॥ १० कियउ तीन कूवारउ जामहँ' वणिवरिंदु मणि चिंतइ तामहि । पुरिसु चित्त उम्माहिउ अच्छइ महिल अवरु पुरिसंतरु वंछइ । पुरिसु रत्त किर णियडउ गच्छइ महिल वंकदिट्ठोट णियच्छ।। पुरिसु वि गाढु गाढु अवरंडइ महिलचित्तु अवरत्तहिँ हिंडइ । पुरिसु णेहसब्भाउ पउंजइ महिल कवडकूडहिँ मणु रंजइ । पुरिसु दविणु आणेवि घरै घल्लइ महिल तं पि चोरेप्पिणु मेल्लइ। पुरिसु अणेयपयारहिँ पिच्छइ महिल अलियवयणाइँ पयच्छइ । पुरिसु चित्तु जुंजई घरदारही महिल होइ आसत्ती" जारही। . घत्ता-कत्थई कज्जवसेण पुणु छुड़ पुरिसु जाइ घरु छंडिवि । तो एत्तहिँ आवइ महिल गाइ व हरहाई हिंडिवि ॥३५॥ १० वोमि विहयहँ' सलिले जलयरहँ गमणागमणायरहँ पायमग्गु जइ कह व दीसइ।.. आदसणे पडिबिंबु हत्थगेज्मु जई कह व सीसइ । पारयरसु जइ सूइमुहे इह थिरु होइ णिरुत्तु । तियही चित्तु पुरिसही उवरि तो ण चलइ अणुरत्तु ॥१॥वस्तु।। ५ महिल रत्तिय करइ कारवइ उवयारविरत्त पुणु सइँ मरेइ मारइ मरावइ । अच्छउ ता किर मरणु मिससएहिँ सुहियई धरावई । ३४. ६ क धावहो धावहो। ३५. १ ग घ वहिं। २ ख पुरिसचित्तु। ३ ग घ पुरिसचित्तु । ४ ख प्रवरि तहिं । ५ ख पुरिसणेहु । ६ ग घ घरि प्राणिवि । ७ ख तहि जि । ८ क पयारं। ६ वयणई जि। १० क जुंजुइ। ११ ग घ प्रासत्तिय । १२ क अच्छइ। १३ खता। १४ क घरिहाई जि । ___३६. १ ख विहंगयहं । २ ख पयडु। ३ ख भादंसे। ४ क हले अज्झइ ख हाथि मिझु जइ पयडु। ५ ख जइ। ६ ख जा। ७ ख ग घ मुहियई (टि० मोहितान् )। ८ ख मुहिप्रय धरावहिः ग घ मुहियएहिं मुहियए धहावइ ।
SR No.032196
Book TitleSudansan Chariu
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNayanandi Muni, Hiralal Jain
PublisherResearch Institute of Prakrit Jainology and Ahimsa
Publication Year1970
Total Pages372
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size28 MB
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