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प्राकृत जैन विद्या विकास फंड के उद्देश्य
(१) इस फंड का उद्देश्य प्राकृत भाषा और साहित्य तथा जैन दर्शन
और साहित्य का अध्ययन करनेवाले विद्यार्थियों को आर्थिक
सहायता देकर प्रोत्साहित करना । (२) प्राकृत एवं जैन साहित्य का प्रकाशन करना एवं करवाना । (३) संशोधन-कर्ताओ एवं विद्यार्थियों के लिए पाठ्यपुस्तक, फीस,
स्टाइपेण्ड, स्कालरशिप, पारितोषिक एवं अन्य प्रकार की आर्थिक
सहायता का प्रबन्ध करना या करवाना । (४) प्राकृत एवं जैन विद्या सम्बंधी निबंध, संशोधन पत्र, ग्रंथ इत्यादि
तैयार करवाना और उन्हें प्रकाशित करने का प्रबन्ध करना । (.) प्राकृत एवं जैन विद्या सम्बंधी और भारतीय संस्कृति सम्बंधी
विद्वानों के व्याख्यानों का प्रबंध करना । (६) ऐसे और भी कार्य करना जो प्राकृत एवं जैन विद्या के विकास
मे उपयोगी हो। (७) उपर्युक्त प्रवृत्तियों का विकास करने के लिए धन-राशि एकत्रित
करना, भेट लेना एवं फंड की व्यवस्था करना । (८) इस कार्य के लिए समान उद्देश्योंवाली संस्थाओं से सहयोग प्राप्त
करना।
सदस्यों के प्रकार (
१. आजीवन सदस्य २. संरक्षक सदस्य
रू. ५०१-०० ३. स्तंभ सदस्य
रू. १००१-०० कोई भी संस्था या फर्म आजीवन, संरक्षक या स्तंभ सदस्य बनकर अपना एक प्रतिनिधि भेज सकती है ।