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VII. विविध ग्रंथों और पत्र-पत्रिकाओं में प्राकृत भाषा साहित्य,
और कथाओं एवं जैनधर्म संबंधी अंग्रेजी, हिन्दी और गुजराती
भाषामें प्रकाशित लगभग ६० में से कुछ महत्त्वपूर्ण लेख : 1. Some Common Terms in Jainism and Buddhism. 2. Extent of the Influence of the Ram Story of Paumacariyam 3. Notes on Some Words from Acaranga. 4. The So Called Sanskrit Plays 5. Sources of Paumasiricariu of Dhāhila 6. A Study of Apabhramsa Passages in pre-tenth
Century Prakrit Works 7. Proportion of Prakrit in Qur Ancient Classical Dramas 8. (Important) Prakrit Forms from the Vasudevahindi
( in many articles) 9. Lord Mahavira and His Teachings 10. Message of Mahavir ११. पउमचरिय' : संक्षिप्त कथावस्तु १२. शृंगारमंजरी-सट्टक (नाटक) का हिन्दी अनुवाद १३. भगवान महावीर का एक नया पूर्वभव १४. संस्कृत की विकास यात्रा: पालि से अन्य प्राकृतों की तरफ १५. पाइय-सह-महण्णवो (प्राकृत-शब्द-कोष) में अनुपलब्ध वसुदेवहिंडी के
(अनेक) शब्द १६. भगवान महावीर के जन्म स्थल के विविध उल्लेख १७. दशवकालिक सूत्र में हिन्दी-शब्द-गवेषणा १८. विदेशी राम-साहित्य पर जैन राम कथाओं का प्रभाव १९. राक्षस एक मानव वंश २०. विद्याधर एक मानव जाति २१. क्या रावण के दश मुख थे ? २२. रामकथा के वानर एक मानव जाति २३. रामकथा विषयक कतिपय भ्रान्त धारणाएँ २५. सर्वांगसुंदरी कथानक २५. कुवलयमाला महाकथा की अवान्तर कथाएं और उनका वर्गीकरण २६. राजस्थान का प्राकृत जैन साहित्य २७. प्राचीन प्राकृत ग्रंथों में उपलब्ध भगवान महावीर का जीवन-चरित २८. ६शवासि सूत्रमा गु०२ती--२६-शेय ૨૬. રામકથા વિશે કેટલીક ગલત ધારણુએ