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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir १०७ १०९ ११२ वार्षिक दान ६३ दीवाली-तिथि ऋषभदेव-वैराग्य ६४ २०-स्थानक १०७ ऋषभदेव-भोजन ६४ कल्याणक-३,२ (६२) १०८ देवदूष्य- . ६४ . (१७० तीर्थकर) ऋषभदेव लोच आश्चर्य अनार्य विहार नग्नता ६६ १ ओर स्थानमें जन्म मारुदेवा-मुक्ति ६७ २ पुत्री की प्राप्ति (धनुष, गजासन) . ३ अवधि प्रकाशन कुमार-तिर्थकर ६५ ४ जिन-उपसर्ग (पुराणो का मतभेद) ६९ ५ ओर स्थान में मोक्ष. १११ व्याह के दि० पाठ ७१ ६चक्री-मानभंग स्त्री तीर्थकरी ७४ ७ वासुदेव-मृत्यु मुनि सुव्रत-गणधर ७४ ८ शलाका ५९ । (मल्लीनाथ-वर्ण) ९ नारद रुद्र (नेमि दीक्षाकाल) १० कल्कि-उपकल्कि ११४ वीर-२७ भव : विच्छेद गर्भापहार (आ० कुंदकुंद) वीर-अभिग्रह ब्राह्मण कुल ११८ मेरु-कंपन बड़ी-आयू वीर लेखशाला ' (भद्र० चंद्र) (आ०धरसेन) । वीर-विवाह १ अट्ठसयसिद्ध (जमाली-निन्हव) २ असंयत पूजा देवदुष्य-दान ३ हरिवंश १२२ वीर छींक ७२ ४ स्त्री तीर्थ वीर-उपसर्ग ८० ५ अपरकंकागमन १२८ (आगमशैली, प्राणीवाचक वन- ६ गर्भापहार (गर्भ विज्ञान) १२८ स्पति, प्राणीजैसेनाम,वीरअहिंसा ७ चमरोत्पात रेवती परिचय, रोग स्वरूप.मल ८ अभाविता पदिषद् पाठ, कपोत-मज्जार-कुक्कुट- ९ उपसर्ग १३७ मंसए के अर्थ) १० सूर्य-चंद्रावतरण १३७ वीर निर्वाण वर्ष १०७ (मृगावती) ११९ १२० १२४ For Private And Personal Use Only
SR No.020729
Book TitleShvetambar Digamber Part 01 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDarshanvijay
PublisherMafatlal Manekchand Shah
Publication Year1943
Total Pages290
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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