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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir 851 ऋतुसंहार यह पाला गिराती हुई हेमंत ऋतु आ गई है, जिसमें कमल दिखाई नहीं देते। अन्या प्रकामसुरतश्रमखिन्नदेहो रात्रि प्रजागर विपाटलनेत्र पद्मा। 4/15 अत्यंत संभोग से थक जाने के कारण एक दूसरी स्त्री की कमल जैसी आँखें रात भर जागने से लाल हो गई हैं। दुमाः सपुष्पाः सलिलंसपऱ्या स्त्रियःसकामाः पवनः सुगन्धिः। 6/2 सब वृक्ष फूलों से लद गए हैं, जल में कमल खिल गए हैं, स्रियाँ मतवाली हो गई हैं, वायु में सुगंध आने लगी हैं। रक्ताशोकविकल्पिताधर मधुर्मत्त द्विरेफ स्वनः कुन्दापीड विशुद्धदन्तनिकरः प्रोत्फुल्ल पद्माननः। 6/36 अमृत भरे अधरों के समान लाल अशोक से मतवाले भौंरों की गूंज से, दाँतों की चमकती हुई पाँतो जैसे उजले कुंद के हारों से, भली-भाँति खिले हुए कमल के समान मुखों से। 12. मृणाल - [मृण + कालन्] कमल - तंतु, कमल नाल, कमल। समुद्धृताशेष मृणालजालकं विपन्न मीनं दुतभीत सारसम्। 1/19 सब कमल उखाड़ डाले, मछलियों को रौंद डाला और सब सारसों को डराकर भगा दिया। व्योम क्वचिद्रजत शङ्खमृणालगौरैःस्त्यक्ताम्बुभिर्लघुतया शतशः प्रयातैः। 3/4 चाँदी, शंख और कमल के समान उजले जो सहस्रों बादल पानी बरसने से हलके होकर इधर-उधर घूम रहे हैं। 13. सरोरुह - [ स + असुन् + रुह] कमल। कुर्वन्ति हंसविरुतैः परितो जनस्य प्रीतिं सरोरुहरजोरुणितास्तटिन्यः। 3/8 जिन नदियों का जल कमल के पराग से लाल हो गया है, जिन पर हंस कूज रहे हैं, वे लोगों को बड़ी सुहावनी लगती हैं। मेखला 1. काञ्ची - [काञ्च + इन् = कांचि + ङीष्] मेखला, करधनी। For Private And Personal Use Only
SR No.020427
Book TitleKalidas Paryay Kosh Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorTribhuvannath Shukl
PublisherPratibha Prakashan
Publication Year2008
Total Pages441
LanguageHindi
ClassificationDictionary
File Size15 MB
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