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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org ६१० ज्ञाताधर्मकथासूत्रे मूलम् - तणं से पंथए दासचेडए देवदिन्नस्स दारगस्स बालग्गाही जाए, देवदिन्नंदारयं कडीए गेव्हइ, गेव्हित्ता बहूहिं डिंभ एहि य डिंभयाहि य दार एहि य दारियाहि य कुमारएहि य कुमारियाहिय सद्धि संपरिवुडे अभिरमइ । तए णं भद्दा सत्यवाही अन्नया कयाई देवदिनं दारयं हायं कयबलिकम्मं कयको उलपायच्छित्तं सव्वालंकार विभूसियं करेइ, करिता पंथयम्स दासचेटयस्स हत्थयंसि दलइ । तपणे से पंथए दासचेडए भद्दाए सत्थवाहीए हत्थाओं देवदिनं दारगं aise froes, गिoिहत्ता सयाओ गिहाओ पडिनिक्खमइ, पडिनिक्खमित्ता बहूहिं डिंभ एहि य डिभियाहि य कुमारएहि य कुमारिया हि यसद्धिं संपवुडे जेणेव गयमग्गे तेणेव उवागच्छइ, उवागच्छित्ता देवदन्नं दारगं एगंते ठावेइ, ठावित्ता बहूहिं डिंभएहि य जाव कुमारियाहिय सद्धिं संपरिवुडे पमत्ते यावि विहरइ । इमं च णं विजए तक रे रायगिस बहूणि दाराणि य अवदाराणि य तहेव जात्र आभोएमाणे मग्गेमाणे गवे सेमाणे जेणेव देवदिन्ने दारए तेणेत्र उवागच्छइ, गच्छत्तदेवदन्नं दारगं सव्वालंकारविभूसिये पासइ पासित्ता देव दिवस्स दारगस्त आभरणालंकारेसु मुच्छिए गढिए गिद्धे अज्झोववन्ने पंथयं उवा Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir अक्खयनिर्हिच अणुवड्ढे ति) बालक के नाम संस्कार होने के पश्चात् मातापिताने उन नागभादिक प्रतिमाओं की खूब सेवा की - दान दिया- अपने हिस्से में से खूब द्रव्य का वितरण किया और उनके कोप की खूब वृद्धि की | सूत्र ६ । दायं च भाय च अक्खयनिर्हिच अणुवति) माणानां नाम संस्कार जाह બાળકનાં માતાપિતાએ નાગ વગેરે પ્રતિમાઓની ખૂબ જ સારી, પેઠે પૂજા કરી, પુષ્કળ પ્રમાણમાં દાન આપ્યું, પોતાના ભાગના દ્રવ્યનું બહુ જ પ્રમાણમાં વિતરણુ यु भने देवताभोना अपनी जूम अभिवृद्धि उरी ॥ सू६ ॥ For Private and Personal Use Only
SR No.020352
Book TitleGnatadharmkathanga Sutram Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalalji Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1963
Total Pages762
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_gyatadharmkatha
File Size24 MB
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