SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 63
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir (६०) अष्टाङ्गहृदयसंहिताकी-अनुक्रमणिका । विषय. पृष्ठ.. विषय. · व्याख्या ... .... .... ९२० । ३३ अ० गुह्यरोगविज्ञानीय नामक २७ अ० भंगप्रतिषेध नामक व्याख्या ... .... .... ९५८ व्याख्या ... .... .... ९२७ ३४ अ० गुह्यरोग प्रतिषेध नामक २८.भ० भगंदरप्रतिषेध नामक ____ व्याख्या .... ... .... ९६६ ३५ अ० विषप्रतिषेध नामक . व्याख्या २९ अ० ग्रंथि अर्बुद श्लीपद अपची व्याख्या .... .... .... ९७४ ३६ अ० सर्पविष प्रतिषेध नामक नाडी विज्ञानीय नामक ____ व्याख्या .... ... .... ९८३ व्याख्या .... .... ... ९३९ ३७ अ० कोटलूतादिविषप्रतिषेध ३० अ० ग्रंथि अर्बुद श्लीपद अपची नामक व्याख्या ... ... ९९५ नाडी प्रतिषेध नामक व्याख्या ९४२ ३८ अ० मूषिकाल विषप्रतिपेध ३१ अ० क्षुद्ररोग विज्ञानीय नामक ___ नामक व्यारट्या .... ....१००७ ___ व्याख्या .... .... .... ९४९ । ३९ अ० रसायननामक व्याख्या १०१२ ३२ अ- क्षुद्ररोग प्रतिषेध नामक ४० अ० वाजीकरणनामक .. व्याख्या .... ... ... ९५४ . व्याख्या .... .... ....१०३६ इति खानदेशीयरावेरग्रामनिवासिपरशुरामभट्टतनयगोविंदशास्त्रिकृता. वाग्भटविरचिताष्टांगहृदयस्थविषयानुक्रमणिका श्रीष्ठि श्रीखेमराजगुप्तकारिता संपूर्णतामयासीत् । शके १८२९ संवत् १९६४ आश्विन शुक्ला १० For Private and Personal Use Only
SR No.020074
Book TitleAshtangat Rudaya
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVagbhatta
PublisherKhemraj Krishnadas
Publication Year1829
Total Pages1117
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size30 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy