SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 634
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ युधिष्ठिर ६२० रेवती राजानो पुत्र ; कैकेयीनो भाई. भरतनो राम पुं० (१) परशुराम.(२) दशरथमामो. कौशल्याना पुत्र रामचंद्र. (३) श्रीयुधिष्ठिर पुं० 'धर्मराज' नाम पण छे. कृष्णना मोटाभाई वलराम. पांच पांडवोमां मोटा.. रामगिरि पुं० नागपुरनी २४ माईल युयुत्सु पुं० धृतराष्ट्र ने वैश्य दासीथी उत्तरे आवेल रामटेक. (२) अथवा थयेलो पुत्र. महाभारतना युद्ध वखते छोटानागपुरना सिरगुजामा आवेल पांडवोना पक्षमा हतो. रामगढ. कालिदास 'मेघदूतना वातने युयुधान पुं० सात्यकि; यादव योद्धो; रामगिरिथी शरू करे छे. तेने शैवलपांडवोना पक्षनो. गिरि पण कहे छे. . यौधेय पुं० वितस्ता (झेलम) अने रावण पुं० पुलस्त्यना पुत्र विश्रवा सिंधु वच्चेनो देश. अने कैकसीनो पुत्र; लंकानो राजा. रघु पुं० सूर्यवंशीय दिलीपराजानो पुत्र. मयासुरनी पुत्री मंदोदरी तेनी स्त्री. अजनो पिता; दशरथनो दादो. ते कुबेर पासेथी पुष्पक विमान पडावेलं. एटलो बधो प्रख्यात थयो के, तेना तेणे करेलु सीताहरण वगेरे कथा उपरथी रघुवंश नाम ऊ, थयु. 'रामायण'नुं वस्तु छे. रघुनंदन, रघुनाथ पुं० रघुवंशमां उत्पन्न राहु पुं० विप्रचित्ति अने सिंहिकानो थयेल श्रीरामचंद्र ; रघुना कुलमां सौथी श्रेष्ठ होवाथी. पुत्र. दानव. अमृत देवोने वहेंचात हतुं त्यारे गुप्त वेशे देवोमा पेसी अमृत रसातल न० सात पातालमांनु एक. पीवा लागेलो. पण सूर्य-चंद्र तेने पश्चिम तार्तरी - हूणोना देश तरीके जोई गया. तेथी विष्णुए तेनुं गर्छ ओळखाय छे. कापी नांख्यु. गळा सुधी अमृत गयेलं, रंतिदेव पुं० पुरुवंशीय राजा. तेगे तेथी तेनो तेटलो भाग अमर थयो. ते गोसव नामनो यज्ञ करेलो. तेमां एटलां सूर्यचंद्रने वेर राखीने ग्रसे छे. बधां पशु वधेरायेलां के तेमनां चामडामांथी चर्मण्वती नदी उत्पन्न थई रुक्मिणी स्त्री० विदर्भ देशना राजा एम कहेवाय छे. भीष्मकनी पुत्री. श्रीकृष्णनी पत्नी. राजगृह न० (१) राजगिर. मगधनी तेनो विवाह प्रथम शिशपाळ वेरे प्राचीन राजधानी. (२) पंजाबमां ठरावेलो. तेथी श्रीकृष्ण साथे शिशुबियास नदीना उत्तर किनारे आवेल पाळने वेर थयेलं. राजगिरि. केकय राजाओनी राजधानी. रुद्रट' पुं० 'काव्यालंकार', 'शंगारराजशेखर पुं० 'बालरामायण', 'बाल तिलक' आदिनो कर्ता. ९मा सैकामां भारत', 'काव्यमीमांसा' आदिनो थई गयेलो. कर्ता. १०मा सैकाना पूर्वार्धमां थई रेणुका स्त्री० परशुरामनी माता; गयेलो. जमदग्निनी पत्नी. चित्ररथ गंधर्व प्रत्ये राढ जुओ 'सुह्म'. आसक्त थवाथी जमदग्निए तेनो राधा स्त्री० कर्णनी पालक माता. वध करवा पुत्रोने हुकम कर्यो. परशुअधिरथ सारथिनी पत्नी. तेना उपरथी रामे पितानी आज्ञानुं पालन करी कर्णनुं नाम 'राधेय' पण छे. कर्ण- तेनो वध कर्यो हतो. नाम 'सूतपुत्र' पण तेथी ज पडघु छे. रेवती स्त्री० बळरामनी पत्नी. Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.016092
Book TitleVinit Kosh
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGopaldas Jivabhai Patel
PublisherGujarat Vidyapith Ahmedabad
Publication Year1992
Total Pages724
LanguageHindi
ClassificationDictionary & Dictionary
File Size14 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy