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________________ मंत्रित ३७५ मंदुरापाल मंत्रित ('मंत्र' न भू० कृ०) वि० सलाह मंदच्छाय वि० झांखं; कांति विनानुं लीधेलु (२) सलाह आपेलु (३) कहेलं मंदता स्त्री०, मंदत्व न० धीमापणुं; (४) मंत्रलं (५) नक्की करेलु (६) सुस्ती (२) जडता (३) मूर्खता (४) न० सलाह नबळापणुं (५) नानापर्यु; ओछापणुं मंत्रिता स्त्री०, मंत्रित्व न० मंत्रीपण मंदधी वि० मंद बुद्धिवाळू; मूर्ख मंत्रिधुर वि० मंत्रीपद वहन करे तेवू मंदपुण्य वि० कमनसीब; दुर्भागी मंत्रिन् वि० सलाह आपवामां कुशळ मंदप्रज्ञ, मंदबुद्धि वि० जुओ 'मंदधी' (२) मंत्रो जाणनाएं (३) पुं० मंत्री; मंदभागिन, मंदभाग्य, मंदभाज वि० सलाहकार (४)मंत्रप्रयोग जाणनारो अभागियु; दुर्भागी; दुखिया मंत्रिपति, मंत्रिप्रधान, मंत्रिप्रमुख, मंत्रि मंदभास् वि० झां [धीमेथी मुख्य मंत्रिवर, मंत्रिश्रेष्ठ पुं० मुख्य मंदम् अ० धीरे धीरे (२) हळवेथी; प्रधान; वडो प्रधान मंदमति, वि० जुओ ‘मंदधी' मंत्रोक्त वि० मंत्रमां के सूक्तमां कहेलं मंदमंदम् अ० धीमे धीमे मंथ् १, ९ प० जुओ ‘मथ' । मंदमेधस् वि० जुओ 'मंदधी' मंथ पुं० वलोवq ते (२) नाश करवो मंदर वि० धीमुं; जड (२) गाढुं (३) ते (३) रवैयो (४) एक मिश्र पीj मोटा कदवाळु (४) पुं० एक पर्वत मंथन पुं० रवैयो (२) न० वलोववं ते (जेने समुद्रमंथन वखते रवैया तरीके (३) घसीने अग्नि उत्पन्न करवो ते वापर्यो हतो) मंथर वि० सुस्त; मंद; निष्क्रिय (२) मंदरम अ० धीमेथी मूर्ख (३) मोटुं; पहोळं (४) वांकुं मंदविभव वि० गरीब ; दरिद्री वळेलं (५) सूचक मंथरविवेक वि० विवेकशक्तिमां मंद मंदविसपिन् वि० धीमे धीमे सरकतुं मंथरा स्त्री० कैकेयीनी दासी मंदवीर्य वि० नबळं मंदाकिनी स्त्री० गंगा नदी (२) स्वर्गगंगा मंथाचल, मंथाद्रि पुं० मंदर पर्वत मंदाक्ष न० लाज ; शरम (रवैया तरीके समुद्रमंथन वखते मंदाग्नि वि० मंद पाचनशक्तिवाळू वापर्यो होवाथी) (२) पुं० मंद जठराग्नि मंथान पुं० रवैयो मंद वि० धीमुं; सुस्त (२) बेदरकार मंदायते आ० (धीमा चालवुढील करवी) (३) जड; मूर्ख (४) ऊंडु- पोलुं मंदार पुं० स्वर्गनां पांच वृक्षोमांनु. (अवाज) (५)धीमुं, हळवं (जेम के एक (२) न० एन फूल स्मित) (६) नानू; अल्प (जेम के मंदारमाला स्त्री० मंदार फूलोनी माळा पेट) (७) कमजोर (जेम के मंदाग्नि) मंदासु वि० मंद पडी गयेला प्राणवाळं; मंदक वि० मूर्ख (२) राग-द्वेष के मान मरवानी तैयारीमां होय तेवू अपमाननी लागणी विनानुं मंदिर न० निवासस्थान; घर (२) मंदकर्ण वि० ओछु सांभळतं महेल (३) देवमंदिर मंदकारिन् वि०धीमी गतिथी के मूर्खपणे मंदीक ८ उ० धीमुं करवू; ओछु करवू काम करतुं मंदीभू १५० धीमुं पडवू; ओछु थवू मंदचेतस् वि० जड बुद्धिनु (२)बेध्यान मंदुरा स्त्री० तबेलो [उपरी (३) लगभग मूर्छित एवं मंदुरापति, मंदुरापाल पुं० तबेलानो National Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.016092
Book TitleVinit Kosh
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGopaldas Jivabhai Patel
PublisherGujarat Vidyapith Ahmedabad
Publication Year1992
Total Pages724
LanguageHindi
ClassificationDictionary & Dictionary
File Size14 MB
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