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________________ परिशिष्ट २ 1 ३२५ के वाचक है। जानना, संवेदन करना, सूक्ष्म अध्यवसायों का उत्पन्न होना-ये सारे ज्ञान के ही विविध पर्याय हैं। जीव का लक्षण है -ज्ञान । ज्ञान से व्यतिरिक्त जीव नहीं होता । ये सारी अवस्थाएं जीव - चेतन तत्व में ही पायी जाती हैं । तणावा (नौ) कुछ जावा शब्द के पर्याय में १४ शब्दों का उल्लेख है । शब्द विभिन्न प्रकार की नावों के वाचक हैं। जैसे - नाव, पोत, तक आदि । नाव तैरने में सहयोगी है, इसी प्रकार नाव के अतिरिक्त अन्य साधन जो तैरने में सहयोगी हैं उनको 'णावा' शब्द के पर्याय के अन्तर्गत लिया गया है । जैसे वेलु (बांस), कुंभ (घड़ा), दृति ( चमड़े की मशक ) आदि, ये सभी तैरने में सहयोगी होने से णावा के पर्याय हैं । safe, सालिका आदि शब्द इस अर्थ में देशी हैं । + णिडालमासक ( ललाटमाशक) 'णिडालमासक' का अर्थ है - ललाट पर किया जाने वाला तिलक | सभी शब्द इसके स्पष्ट वाचक हैं। 'अवंग' शब्द संभवत: इसी अर्थ में देशी होना चाहिए । निम्मंसक (निर्मासक ) 'निम्मंसक' शब्द के पर्याय में अनेक शब्दों का उल्लेख है । जिसका शरीर तपस्या या किसी कारण से सूख कर कांटा हो जाता है, हड्डियों का ढांचा मात्र रह जाता है वह निर्मांसक होता है । अस्थिकलेवर आदि शब्द उसी के वाचक हैं। शुष्क, निशुष्क, परिहीन, अवक्षीण आदि शब्द शरीर की उसी अवस्था के बोधक हैं । णिव्वाण (निर्वाण ) 'णिव्वाण' शब्द के पर्याय में ५ शब्दों का उल्लेख है । टीकाकार ने इनको 'निर्वाणसुख' का एकार्थक माना है । मोक्ष का सुख बाधा रहित होता है, इसलिए अनाबाध तथा वहां कषायाग्नि शान्त हो जाती है इसलिए शीतीभूतपद भी इसका एक पर्याय है । ' १. आटी प १५० Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.016050
Book TitleEkarthak kosha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMahapragna Acharya, Kusumpragya Shramani
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year1984
Total Pages444
LanguagePrakrit, Sanskrit, Hindi
ClassificationDictionary & Dictionary
File Size12 MB
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