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________________ 214 जैन आगम : वनस्पति कोश भंडी भंडी (भण्डी) मंजीठ प०१/३७/५ विमर्श-प्रस्तुत प्रकरण में भंडी शब्द गुच्छवर्ग के अन्तर्गत है। भंडी के तीन अर्थ हैं-मजीठ, शिरीष और श्वेतत्रिवृत। मजीठ के फूल झुमकों में लगते हैं इसलिए यहां मजीठ अर्थ ग्रहण कर रहे हैं। मजीठ के पर्यायवाची नाम मञ्जिष्ठा कालमेषी च, समङ्गा विकसाऽरुणा। मझुका रक्तयष्टी च, भाण्डी योजनवल्ल्यपि।।१७।। क्षेत्रिणी विजया रक्ता, रक्ताङ्गी वस्त्रभूषण: जिङ्गी भण्डी तथा काला, गण्डाली कालमेषिका ।/१८ // मञ्जिष्ठा, कालमेषी, समङ्गा, विकसा, अरुणा, मंजुका, रक्तयष्टी, भाण्डी, योजनवल्ली, क्षेत्रिणी, विजया, रक्ता, रक्ताङ्गी, वस्त्रभूषण, जिङ्गी, भण्डी, काला, गण्डाली, कालमेषिका ये सब मञ्जिष्ठा के पर्यायवाची शब्द हैं। (धन्व०नि०१/१७.१८ पृ०२१) अन्य भाषाओं में नाम पश्चिमोत्तर हिमालय से पूर्व की ओर तथा दक्षिण की ओर नीलगिरी, सीलोन और मलाका एवं नेपाल में ८ हजार फीट तक उत्पन्न होती है। यह लता जाति की वनौषधि बहुत विस्तार में दूर-दूर तक फैल जाती है। इसकी लम्बी जड़ भूमि के भीतर दूर तक घुस जाती है। डंठल कई गज लम्बा, गावदुम, खुरदरा, जड़ की ओर कठोर । छाल सफेदी मायल किन्तु भीतर का भाग लाल होता है । शाखा प्रशाखाओं करके सघन बेल निकटवर्ती वृक्षों पर चढ़कर फैलती है। पत्ते प्रत्येक गन्थि पर चार-चार के चक्रों में, जिसमें से दो बड़े होते हैं। ये १.५ से ४ इंच लम्बे, लट्वाकार-ताम्बूलाकार, नोकीले, खरस्पर्श युक्त या चिकने होते हैं। पत्रनाल २ से ४ इंच लम्बा होता है पुष्प नन्हें-नन्हें श्वेतवर्ण के गुच्छों में रहते हैं। फल काले चने के बराबर तथा दो बीजों से युक्त होते हैं। मूल लम्बे, लम्बगोल तथा ताजी अवस्था में लाल तथा सूखने पर कुछ काले हो जाते हैं। मूलका स्वाद प्रारंभ में मिठास लिये हुए लेकिन बाद में कुछ तीता और कुछ कडवा होता है (भाव०नि० हरीतक्यादिवर्ग०१०११०, १११) मजीठTNE भतिय भंतिय (भक्तिका) आरामशीतला भ०२१/१६ भक्तिका स्त्री आराम शीतलायाम् (वैद्यक निघंटु) (वैद्यक शब्द सिन्धु पृ० ७४०) आरामशीतला स्त्री। रामशालीति महाराष्ट्रख्याते सुगंधपत्रशाकविशेषे (वैद्यक शब्द सिन्धु पृ०११५) आरामशीतला के पर्यायवाची नाम आरामशीतला नन्दा, शीतला सा सुनन्दिनी। रामा चैव महानन्दा, गन्धाढ्यारामशीतला ।।१७१।। आरामशीतला, नन्दा, शीतला, सुनंदिनी, रामा, महानन्दा, गंधाढया तथा रामशीतला ये सब आराम शीतला के नाम हैं। (राज०नि०१०/१७१ पृ०३३२) अन्य भाषाओं में नाम हि०-(पश्चिम देशों में) आरामशीतला। म०-रामशाली। क०-रामशाली। उत्पत्ति स्थान-यह अत्यन्त शीतल स्थान हिमालय हिO-मजीठ, मंजीठ। बं०-मञ्जिष्ठा। ते०मञ्जिष्ठतीठी, ताम्रवल्ली, मण्डास्टिक । ताo-मझिट्टी, मन्दित्ता। गु०-मजीठ। पं०-मीठ। मल०-पून्त । फा०-रोदक। अ०-फबहत, फब्बाह फौहल अवागीन। अ०-Madder root (मॅडररुट) Indian madder (इण्डियन मॅडर)। ले०-Rubia cordifolia linn (रूबिया कॉर्डिफोलिया, लिन०) Fam. Rubiaceae (रुबिएसी)। उत्पत्ति स्थान-इस देश की पहाड़ी भूमि में Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.016039
Book TitleJain Agam Vanaspati kosha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShreechandmuni
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year1996
Total Pages370
LanguageHindi
ClassificationDictionary, Dictionary, Agam, Canon, & agam_dictionary
File Size8 MB
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