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________________ ७९४ करना, प्राप्त करना । संपणदिय देखो संपणाइय | } संक्षिप्त प्राकृत-हिन्दी कोष विशेष | संपदि देखो संपइ = सम्प्रति । संपदि देखो संपत्ति = संपत्ति । करना । संवित्ति स्त्री [ संप्रतिपत्ति ] स्वीकार । संपडिवाइअ वि [ संप्रतिपादित] स्थित | स्थापित । संपधार देखो संपहार = संप्र+धारय् । संपडिवायस [ संप्रति + पादय् ] संपादन संपधारणा स्त्री [ संप्रधारणा ] व्यवहारविशेष, धारणा व्यवहार । संप संपणा देखो संपण्णा । संपणाइय वि [ संप्रणादित] समीचीन संपप्प देखो संपाव । संपणादिय शब्दवाला | संपणाम सक[संप्र + नामय् ] अर्पण करना । संपणिपा पुं [सप्रणिपात] प्रणाम, संपणिवाय समीचीन नमस्कार । संपण वि [ संप्रतुन्न] प्रेरित, उत्तेजित । संपणुल्ल सक [ संप्र + नुद् ] प्रेरणा संपणोल्ल } करना । संपण्ण देखो संपन्न । संपण्णा स्त्री [दे] घेबर या घीवर ( मिष्टान्नविशेष ) बनाने का गेहूँ का आटा । संपत्तवि [ संप्राप्त ] सम्यक् प्राप्त । समागत । संपत्त पुंन [संपात्र ] सुपात्र । संपत्ति स्त्री [ संपत्ति ] समृद्धि । संसिद्धि | पूर्ति । संपत्ति स्त्री [ संप्राप्ति ] लाभ, प्राप्ति । संपत्ति स्त्री [] बाला | पिप्पली -पत्र | संपत्थिअ न [ दे] शीघ्र । संपत्थिय वि [ संप्रस्थित] जिसने प्रयाण संपत्थित किया हो वह, प्रयात, प्रस्थित | उपस्थित | संपदं अ [ सांप्रतम् ] युक्त, उचित । अब । संपदत्त वि [ संप्रदत्त ] दिया हुआ, अर्पित । संपदाण देखो संपयाण । संपदाय पुं [ संप्रदाय ] गुरु-परंपरागत उपदेश, आम्नाय । संपदावण न [ संप्रदापन, संप्रदान ] कारक Jain Education International संपधारिय वि[संप्रधारित ] निश्रित, निर्णीत | संधूमि वि[संप्रधूमित ] धूप-वासित । संपन्न वि. सम्पत्ति-युक्त । संसिद्ध । संपडिवत्ति - संपरिखित्त संपबुज्झ अक [ संप्र + बुध् ] सत्य ज्ञान को प्राप्त करना संपमज्ज सक [ संप्र + मृज् ] मार्जन करना । संपमार सक [ संप्र + मारय् ] मूच्छित करना । संपय वि[सांप्रत ] विद्यमान वर्तमान | संपयं देखो संपदं । संपयट्ट अक [ संप्र + वृत् ] सम्यक् प्रवृत्ति करना । संपवि[संप्रवृत्त] सम्यक् प्रवृत्त । संपया स्त्री[संपद्] संमृद्धि, सम्पत्ति, लक्ष्मी । वाक्यों का विश्राम स्थान । प्राप्ति । एक वणिक् - स्त्री । संपयाण न [ संप्रदान ] सम्यक् प्रदान, समर्पण | चतुर्थी - कारक, जिसको दान दिया जाय वह । संपयावण देखो संपदावण । संपराइग संपराइय वि [सांपरायिक ] सम्पराय - सम्बन्धी, सम्पराय में उत्पन्न । संपराय पुं. संसार, जगत् । 1 क्रोध आदि कषाय । स्थूल कषाय । कषाय का उदय । युद्ध । संपरिकित्ति पुं [ संपरिकीत्ति ] राक्षस वंश का एक राजा, एक लंका - पति । संपक्खि स [ संपरि + ईक्ष् ] सम्यक् परीक्षा करना । } [परिक्षिप्त ] वेष्टित । संपरिक्खित्त संपरिखित्त For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.016020
Book TitlePrakrit Hindi kosha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorK R Chandra
PublisherPrakrit Jain Vidya Vikas Fund Ahmedabad
Publication Year1987
Total Pages910
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationDictionary & Dictionary
File Size19 MB
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