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________________ ३१६ चविडा चवेला संक्षिप्त प्राकृत-हिन्दी कोष चरीया-चाई गमन, गति, विहार । गाड़ी। चव सक [कथय] कहना, बोलना। चरीया देखो चरिया = चर्या । चव अक [च्यु] मरना, जन्मान्तर में जाना । चरु पुं. स्थाली-विशेष । पात्र-विशेष । गिर जाना, पतन होना। चरुगिणय देखो चारुइणय । चव पु [च्यव] मौत । चरुल्लेव न [दे] नाम, आख्या। चवचव पु. 'चव-चव' आवाज । चल सक [चल्] चलना, गमन करना । अक. चवल वि [चपल] चंचल, अस्थिर । आकुल, कांपना, हिलना। व्याकुल । पुं. रावण का एक सुभट । चल वि. चंचल । पु. रावण का एक सुभट । चवल पु[दे] अन्न-विशेष, बोड़ा। चलचल वि. अस्थिर। पुं. घी में तली जाती | चवलय पुंदे] धान्य-विशेष । हुई चीज का पहला तीन घान । चवला स्त्री [चपला] बिजली । चलण पु [चरण] पाँव, पाद । °मालिया | चविआ स्त्री [चविका] वनस्पति-विशेष । स्त्री [°मालिका] पैर का आभूषण-विशेष । °वंदण न [°वन्दन] पैर पर सिर झुका कर | चविला स्त्री [चपेटा] तमाचा, थप्पड़ । प्रणाम। चलण न [चलन] चलना, गति, चाल, प्रथा, | चवेडी स्त्री [दे] श्लिष्ट कर-संपुट । संपुट, रिवाज । समुद्र, डिब्बा । चलणाउह पु [चरणायुध] कुक्कुट । चवेण न [दे] वचनीय, लोकापवाद । चलणाओह पु [दे. चरणायुध] ऊपर देखो। चवेला देखो चविडा। चलणिया । स्त्री [चलनिका, नो] जैन | चव्व सक [चर्व ] चबाना। चलणी साध्वियों को पहनने का कटि-चव्व (शौ) देखो चच्च = चर्च । वस्त्र। चव्वक्किअ वि [दे] धवलित, चूने से पोता चलणी स्त्री [चलनी] साध्वियों का एक | हुआ। उपकरण । पैर तक का कोच । चव्वाइ देखो चव्वागि। चलवलण न [दे] चटपटाई, चंचलता। चव्वाक | पुं [चार्वाक] नास्तिक, बृहचलाचल वि. चंचल, अस्थिर । चव्वाग ) स्पति का शिष्य, लोकायतिक । चलिंदिय वि [चलेन्द्रिय] इन्द्रिय-निग्रह करने | चव्वागि वि [चार्वाकिन्] चबानेवाला । में असमर्थ, जिसकी इन्द्रियाँ काबू में न हों। दुव्यवहारी।। बह। चस सक [चष्] चखना। चलिअ न [चलित] विकलता, अस्थैर्य, | चसग । पु[चषक] दारू पीने का प्याला। चंचलता । वि. चला हुआ, कम्पित । प्रवृत्त । | चसय ) प्याला । पक्षि-विशेष । विनष्ट । चहुतिया स्त्री [दे] चुटकी, चुटकीभर । चल्ल देखो चल = चल । चहुट्ट अक [दे] चिपकना, चिपटना, लगना । चल्लणग न [दे] कटि-वस्त्र । चट्ट वि [दे] निमग्न, लीन । चिपका हुआ । चल्लि स्त्री [दे] नाचते समय की एक प्रकार | चहाड पु [दे] एक मनुष्य-जाति । की गति । चाइ वि [त्यागिन्] त्याग करनेवाला । दानी, चल्लि स्त्री [दे] मदन-वेदना । | उदार । निःसंग, निरीह, संयमी । Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.016020
Book TitlePrakrit Hindi kosha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorK R Chandra
PublisherPrakrit Jain Vidya Vikas Fund Ahmedabad
Publication Year1987
Total Pages910
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationDictionary & Dictionary
File Size19 MB
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