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________________ अनुक्रमणिका प्रथम विभाग एक पारस - पुरुष का गरिमामय जीवन - कविरत्न श्री केवल मुनि ० एक शाश्वत धर्म - दिवाकर • उद्भव : एक कल्पांकुर का ० उदय धर्म दिवाकर का द्वितीय विभाग घटनाओं में बोलता व्यक्तित्व : स्मृतियों के स्वर अशोकमुनि, साहित्यरत्न श्री रमेश मुनि वाणी के देवता वशीकरण मन्त्र सन्त वाणी का असर अनुभूत-प्रसंग समय की बात व्यक्तित्व की अमिट छाप अन्तिम दर्शन नजर भर देखा तो लोहामण्डी सोनामण्डी बन गई अफीम भी गुड़ बन गया आध्यात्मिक ज्ञान की जलती हुई मशाल क्या ये चमत्कार नहीं है ? क्या चौथमलजी महाराज पधारे हैं ? जैसी करनी वैसी भरनी पाँच मिनट में मीड़ युग का एक महान् चमत्कार Jain Education International " नरेन्द्र मुनि 'विशारद' गणेशलाल धींग, छोगालाल धींग श्री ईश्वर मुनि कविरत्न केवल मुनि For Private & Personal Use Only मोतीसिंह सुराना सोहनलाल जैन गणेश मुनि शास्त्री श्री देवेन्द्र मुनि शास्त्री चांदमल मारु रिखबराज कर्णावट श्रीमती गिरिजा 'सुधा' सौभाग्यमल कोचट्टा बापूलालजी बोथरा १ ८ तृतीय विभाग अहिंसा और सदाचार की प्रेरणा के साक्ष्य : ऐतिहासिक दस्तावेज १३३-१७२ २१ १०५ १०७ १०८ १०६ १११ ११२ ११३ ११७ ११८ १२० १२२ १२८ १२६ १३० १३१ १३२ www.jainelibrary.org
SR No.012021
Book TitleJain Divakar Smruti Granth
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKevalmuni
PublisherJain Divakar Divya Jyoti Karyalay Byavar
Publication Year1979
Total Pages680
LanguageHindi
ClassificationSmruti_Granth & Articles
File Size17 MB
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