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________________ आयारदसा ७७ मासिकी भिक्षु-प्रतिमा-प्रतिपन्न अनगार को सचित्त पृथ्वी पर निद्रा लेना या ऊंघना नहीं कल्पता है। केवली भगवान ने सचित्त पृथ्वी पर नींद लेने या ऊंघने को कर्मबंध का कारण कहा है। __वह बनगार सचित्त पृथ्वी पर नींद लेता हुआ या ऊंघता हुआ अपने हाथों से भूमि का स्पर्श करेगा (और उससे पृथ्वी काय के जीवों की हिंसा होगी) अतः उसे यथाविधि (सूत्रोक्तविधि) से निर्दोष स्थान पर ठहरना चाहिए या निष्क्रमण करना चाहिए। ___ यदि अनगार को मल-मूत्र की वाघा हो जाए तो रोकना नहीं चाहिए, किन्तु पूर्व प्रतिलेखित भूमि पर त्याग करना चाहिए। और पुनः उसी उपाश्रय में आकर यथाविधि निर्दोष स्थान पर ठहरना चाहिए। सूत्र २१ मासियं गं भिक्खु-पडिमं पडिवनस्सनो कप्पति ससरक्खेणं फाएणं गाहावइ-फुलं भत्तए वा पाणए वा निक्खमित्तए वा पविसित्तए वा । अह पुण एवं जाणेज्जाससरक्खे से अत्ताए वा जल्लताए वा मल्लत्ताए वा पंफत्ताए वा विसत्ये, से कप्पति गाहावइ-कुलं भत्तए वा पाणए वा निक्समित्तए वा पविसित्तए वा। मासिफी भिक्षु-प्रतिमा प्रतिपन्न अनगार को सचित्त रजयुक्त काय से गृहस्थों के गृह-समुदाय में भक्त-पान के लिए निष्क्रमण और प्रवेश करना नहीं कल्पता है । यदि यह ज्ञात हो जाये कि गरीर पर लगा हआ सचित्त रज स्वेद,शरीर पर लगे हए मेल या पंक (प्रस्वेद) से अचित्त हो गया है तो उसे गृहस्यों के गृह समुदाय में भक्त-पान के लिए निष्फ्रमण-प्रवेश करना फल्पता है। विशेषावं-प्रस्तुत सूत्र में "सचित्त रजयुक्त काय" का उन्लेरा हैउसका अभिप्राय यह है कि निक्षु-प्रतिमा प्रतिपन्न अनगार जिस उपाश्रय में ठहरा हुआ हो और उसके समीप ही किसी खान से मिट्टी खोदी जा रही हो तो वह सनित रज उड़कर अनगार के काय पर लग जाती है, अतः "सचित्त रज युक्त काय" से गोचरी के लिए घरों में जाने का यहाँ निषेध है, किन्तु गरीर पर पसीना बह रहा हो उस समय भरीर पर लगी हुई नचित रज अनित्त हो जाती है अथवा गरीर के मेन पर लगी हुई सचित्त रज भी अचित्त हो जाती है तब वह अनगार गोनरी के लिए गृहस्थों के घरों में आ जा सकता है।
SR No.010768
Book TitleAgam 27 Chhed 04 Dashashrutskandh Sutra Aayaro Dasha Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherAgam Anuyog Prakashan
Publication Year1977
Total Pages203
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, & agam_dashashrutaskandh
File Size6 MB
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