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________________ स्तवनावली। ८५ सैयां ॥३॥ तुम बिन कौन करे मुज करुणा विनती सीकारो करुणाधाम ॥ मैरी सैयां ॥४॥ करुणादृग नरी तनु कज निरखो । पामुं पद जीम आतमराम॥ मेरी सैयां ॥ ५ ॥ स्तवन सोळमुं। ॥ राग भोपाली ताल दीपचंदी ॥ इतनुं मागुरे देवा इतनुं मागंरे, नव नव चरण शरण तुम केरो ॥ इतनुं । आंचली ॥ सिधारथ नृप नंदन केरो, त्रिशला माता आनंद वधेरो । ज्ञातनंदन प्रजु त्रिजुवन मोहे, सोहे हरित लव फेरोरे ॥ इतनुं० ॥ १॥ दीनदयाल करुणानिधि स्वामी, वर्धमान महावीर जलेरो ॥ श्रमण सुहंकर दुःख हरनामी । आर्यपुत्र चम भूत दलेरो ॥ इतनु० ॥॥ तेरेहि नामसे हुँ मदमातो, स्मरण करत आनंद नरेरो । तेरे नरोसें ही जीति नीवारी, आनंद मंगल तुमही खरेरो ॥ इतनं ॥३॥ पूरण पुण्य उदय करी पामी, शासन तुमरो नाश अंधेरो । जयो जगदीश्वर वीर जिनेश्वर । तुं मुज ईश्वर हुं तुम चेरो ॥इतनुं ॥४॥आतमराम आणंद रस पूरण,
SR No.010687
Book TitleAtmanand Stavanavali
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKarpurvijay
PublisherBabu Saremal Surana
Publication Year1917
Total Pages311
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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