SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 359
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ श्री जैन सिद्धान्त बोल संग्रह, पाठवाँ भाग ३११ विषय बोल भाग पृष्ठ प्रमाथा सम्पति स्थावर काय ४१२ १ ४३८ ठा ५उ १ सू ३६३ सम्पदो प्रतिलेखना ४४६ २ ५४ ठा ६सू ५०३,उत्त अ २६गा २६ सम्मूर्छिम जन्म ६६ १४७ तत्त्वार्थ अध्या.२सू ३२ । सम्मूर्छिम मनुष्यों के उत्प ८२६ ५ १८ पन्न १ १सू ३७,अनु सू १३३ त्ति स्थान चौदह सम्मूर्छिम वनस्पति ४६६ २ ६६ दशम ४ सू.१ सम्मूछिम वायु ४१३ १ ४३६ टा ५३ ३ सू ४४४ सम्मोही भावनाके५प्रकार ४०६ १ ४३२ उत्त अ ३६गा २६५टी ,प्रव द्वा. ७३ गा६४६ सम्यक्चारित्र ७६ १ ५७ उत्त अ २८गद ३०,तत्त्वार्थ.प्रध्या.१ सम्यक्चारित्र ४६७ २ १८४ सम्यक्त्व के उपबृहणा ८२१ ४ ४६५ नवपद गा १८टी सम्यक्त्वाआचार परश्रेणिक की कथा विकार सम्यक्त्व के कॉक्षादोष के ८२१ ४ ४५५ नवपद गा.१८ टी सम्यक्त्वालिए कुशध्वज का दृष्टान्त धिकार सम्यक्त्व के चार प्रकार से १० १८ प्रव द्वा १४६गा ६४२,कर्म भा. दोदो भेद १गा.१५,तत्त्वार्थ अध्या १,पन्न 4 सू ३७, ठा २ उ १सृ ७० सम्यक्त्व के जुगुप्सा दोष ८२१ ४ ४५८ नवपद.गा १८टी सम्यक्त्वाके लियेदुर्गन्धा का उदाहरण धिकार सम्यक्त्व के दो प्रकार से ८० १ ५८ विशे गा.२६७५, द्रव्यलो.स तीन भेद श्लो ६८-७०,ध अधि.२श्लो २-टी पृ ३६,श्रागा ४६५०, प्रवद्वा १४९ गा६४३. १४५,कर्म भा.१ गा.१५,
SR No.010515
Book TitleJain Siddhanta Bol Sangraha Part 08
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBhairodan Sethiya
PublisherJain Parmarthik Sanstha Bikaner
Publication Year1945
Total Pages403
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & agam_related_other_literature
File Size11 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy