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________________ २०] महाचन्द जैन भजनावली । की आयु लई अधिकारीरे। आधी तो सोनेमें खोई तेरा धर्म ध्यान बिसरारीरे ॥ भाई ॥२॥ बाकी रही पचास वर्षमें तीन दशा दुखकारीरे । बाल अज्ञान जवान त्रियारस वृद्धपने बलहारीरे ॥ भाई० ॥३॥ रोग अरु शोक संयोग दुःख बसि बीतत हैं दिनसारी रे। बाकीरही तेरी आयु किती अब, सोते नाहिं बिचारीरे ॥ भाई०॥ ४॥ इतनेहीमें किया जो चाहै सो तू कर सुखकारीरे॥ नहीं फंसेगा फंद बिच पंडित महाचन्द्र यह धारीरे ॥ भाई० ॥ ५॥ (२८) . जीव तू भ्रमत भ्रमत भव खोयो जब चेत भयो तब रोयो॥ जीव तू ॥ टेर ॥ सम्यकदर्शन ज्ञान चरण तप यह धन धूरि बिगोयो। बिषय भोग गत रसको रसियो छिन छिनमें अति सो. यो॥जीव० ॥१॥ क्रोध मान छल लोभ भयो तब इनहीमें उर झोयो । मोहरायके किंकर यह सब इनके बसिव्हे लुटोयो॥ जीब० ॥ २॥ मोह
SR No.010454
Book TitlePrachin Jainpad Shatak
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJinvani Pracharak Karyalaya Calcutta
PublisherJinvani Pracharak Karyalaya
Publication Year
Total Pages427
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size12 MB
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