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________________ पुरातन-जैनवाक्य-सूची अंकायारा विजया तिलो० ५०४-२५५२ अंतरकदपढमादो सद्धिसा० १५० अंकायारा विजया तिलो. प० ४-२७६४ अंतरफदा दु छण्णो लदिसा० २६२ अंग सुहमइँ वादर परम० प० २-१०३ अंतरगा तटसंखेज गो०० २५५ अंगदछुरियाखग्गा तिलो० प० ४-३६३ | अंतरतचं जीवो कत्ति० अणु० २०५ अंगसुदे य बहुविधे भ० श्रारा० ४१६ तिलो० ५० १-२१२८ अंगाई दस य दुरिणय भावपा० ५२ / अंतरदीवे माया मूला० १२१२ अंगारय सिय ससिसुय- थाय० ति०४-११ | अंतरपढम पत्ते सद्धिसा० ८५ अंगुल असंखगुणिदा गो० क० ३८६ | अतरपढमठिदि त्ति य लदिसा० ५२ अंगुल असंखभाग गो० क० २३० अंतरपढमठिदि त्ति य लद्विसा० ५३ अंगुलअसंखभागं गो० क० ४३४ | अंतरपढमठिदि त्ति य लदिमा० ५५ अंगुलअसंखभागं मूला० १०८७ | अंतरपढठिदि त्ति य लद्विसा० ५८६ अंगुलअसंखभार्ग गो० जी० ३६० अंतरपढमा दु कमे लदिसा० २४८ अंगुलअसंखभागं गो० जी० ४०० अंतरपढमे अण्णो लद्धिसा०२४२ अंगुलअसंखभाग गो० जी० ४०८ | अंतरवाहिरजप्पे णियमसा० १५० अंगुलअसंखभागं गो० जी० १७१ / अंतरभावप्पबहु गो० जी० ४६१ अंगुलअसंखभाग गो. जी. ३६८ अंतरमवरुक्कसं गो० जी० ५५२ अंगुलअसंखभागे गो० जी० ३२५ अंतरमुवरी वि पुणो गो० क० २३६ अंगुलअसंखभागो कत्ति अणु० १६६ अंतरमुहुत्तकालो भावस०६७८ अंगुलअसंखभागो गो० जी० ६६६ / अंतरमुत्तमझे भावस०४०६ अंगुलमावलियाए गो० जी० ४०३ / अंतररहियं वरिसइ जवू० प०७-१३८ अंगुलिणहावलेहणिमूला० ३३ | अंतरहेढुक्कीरिद लखिसा० २४३ अगुलि तह अालत्तय रिट्ठस० १४८ अंतरायस्स कोहाई पंचमं०४-२११ अंगे पासं किच्चा भावसं० १३६ | अंतरिए अंतरियं श्राय० ति०२-२६ अंगोवंगट्ठीण तिलो० प० २-३३६ | अंताइसूइजोग्गं तिलो० सा० ३१५ अंगोवंगुदयादो गो० जी० २२८ | अंतादिमज्महीणं जंबू० प० १३-१६ अंजणकवन्नधाउक- तिलो० सा० २८३ | अंतादिमझहीरणं तिलो०प०१-६८ अंजणगिरिसरिसाणं जंबू० प० ७-६५ अंतिमए छइंसण पंचसं०१-४६५ अंजगदहिकरणयणिहा तिलो. सा. ६६८ | अंतिमखधंताई तिलो. प० ४-६७० अजणदहिमुहरइयर- जबू० प०३-३७ / अंतिमजिणणिव्वाणे णदी० पट्टा०१ अंजणपहुदी सत्त य- तिलो० ५० ८-१३६ अंतिमजिणणिवाणे णदी० पट्टा० १० अंजणमूलं अंक तिलो. प० २-१७ अतिमठाणं सहमे गो० क०५४८ अंजणमूलंकणिहो तिलो० प०४-२०६५ / अंतिमतियसंहडण गो० क.३२ अंजणमूलिय अंका तिलो० सा० १४८ | अंतिमतियसंहडण कम्मप०६० अंजलिपुडेण ठिच्चा मूला० ३४ / अंतिमरसखंडुक्की नद्धिसा० ६३ अडजपोतनजरजा पंचस. १-०३ / अंतिमरसखंडुक्की लदिसा. १७६ अंडेसु पवढंता पचस्थि० ११३ / अंतिमरुंदपमाणं तिलो० ५० ५-२५३ अंतज्जोई कमलं णाणसा० १० अंतिमविक्खंभद्धं तिलो. प०५-२६३ अंतयडं वरमंगं अगप०१-४८ | अंतु वि गंतुवि तिहुवणहँ परम०प०२-२०३(बा०) अंतरफडपढमादो लद्धिसा० ८७ अंते अंकसुहा खलु जंबू० ५० ११-१ अंतरफदपढमादो लद्धिसा० २१० | अंते टंकच्छिण्णो तिलो. सा. ६३.
SR No.010449
Book TitlePuratan Jain Vakya Suchi 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJugalkishor Mukhtar
PublisherVeer Seva Mandir Trust
Publication Year1950
Total Pages519
LanguageHindi
ClassificationDictionary
File Size33 MB
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