SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 53
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ हवा-महल पिता के बाद युवराज राजा हुए। नई उनकी वय थी, प्रेम में पालन पाया था । लोक की रीति-नीति से अभी अनजान थे । मन में कुछ सपने थे, तबियत में ईपत् आग्रह । अनुभव था नहीं, सो स्वभाव में किसी कदर मनमानापन था। ___ पर राजमन्त्री लोग अनुभवी थे, और जानकार थे। वे राजा को किशोर पाकर अप्रसन्न नहीं थे । सावधान रहना उनका काम था और वे राजकाज की गुरुता के बार में नये राजा को सीख और चेतावनी देते रहते थे। इन राजकिशोर को सँभाल कर योग्य बनाना होगा, अतः वे राजा के आनन्द-विलास का ध्यान भी रखते थे। ___ एक रोज प्रधान राजमन्त्री ने महाराज के पास आकर कहा, "महाराज, वह महल, जिसमें आप रहते हैं, पुराना हो गया है। आपके पिता इसमें रहते थे, पिता के पिता इसमें रहते थे। नये महल नई तरह के होते हैं। नई तरह का नया महल एक बनना चाहिए। इतिहास के बड़े लोग अपनी निर्मित कृतियों से याद किये जाते हैं।
SR No.010356
Book TitleJainendra Kahani 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPurvodaya Prakashan
PublisherPurvodaya Prakashan
Publication Year1953
Total Pages236
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size16 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy