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________________ १- न्याय १३ (२१) साध्य किसको कहते हैं ? इष्ट, अबाधित, असिद्ध को साध्य कहते हैं । साधन या हेतु द्वारा जो बात सिद्ध की जाय उसे साध्य कहते हैं । (२२) इष्ट किसको कहते हैं ? ३- परोक्ष प्रमाणाधिकार वादी तथा प्रतिवादी जिसको सिद्ध करना चाहते हैं, उसे इप्ट कहते हैं । (२३) अबाधित किसको कहते हैं ? जो दूसरे प्रमाण से बाधित न हो, जैसे अग्नि का ठण्डापन प्रत्यक्ष प्रमाण से बाधित है । इस प्रकार यह ठण्डापन साध्य नहीं हो सकता । २४. बाधित कितने प्रकार का होता है ? पांच प्रकार का - प्रत्यक्ष, अनुमान, आगम, लोक व स्ववचन बाधित | २५. पांचों बाधित पक्षों के लक्षण व उदाहरण बताओ । (क) प्रत्यक्ष प्रमाण से बाधित प्रत्यक्ष बाधित है, जैसे अग्नि ठण्डी है क्योंकि छूने से ठण्डी महसूस होती है । (ख) अनुमान प्रमाण से बाधित अनुमान बाधित है, जैसे शब्द अपरिणामी है क्योंकि किया जाता है । (ग) आगम प्रमाण से बाधित आगम बाधित है, जैसे पाप से सुख होता है। (घ) जो लोकमान्य न हो वह लोक बाधित है, जैसे मनुष्य की खोपड़ी पवित्र है, क्योंकि प्राणी का अंग है जैसे शंख । (ङ) जिसमें स्वयं अपने वचन से बाधा आती हो वह स्ववचन बाधित है, जैसे 'मैं आज मौन से हैं, क्योंकि आज मुझे बोलने का त्याग है', ऐसा मुँह से कहकर बताना । (२६) असिद्ध किसको कहते हैं ? जो दूसरे प्रमाण से सिद्ध न हो उसे असिद्ध कहते हैं, अथवा जिसका निश्चय न हो उसे असिद्ध कहते हैं ।
SR No.010310
Book TitleJain Siddhanta Sutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKaushal
PublisherDeshbhushanji Maharaj Trust
Publication Year
Total Pages386
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size19 MB
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