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________________ २७५ राजनीति मे लोकशासन के विषय मे For the people, by the people, and of the people'-जनता के लिए, जनता के द्वारा और जनता का, ऐसा एक सूत्र है । आत्मा के क्षेत्र मे भी हमे जो अनुभव प्राप्त करना है वह भी 'पात्मा के लिए, आत्मा के द्वारा और आत्मा का'--For the soul, by the soul and of the soul-होना चाहिए । राजनैतिक दर्शन--Political philosophy के चिन्तको ने पूर्ण लोकशासन तथा सुराज्य के विषय मे जो उच्च और चरम-Highest extreme-कल्पना की है उसमे 'राजा राज्यकर्त्ता अथवा राज्यतन्त्र' जैसा कुछ नही होता। किसी भी प्रकार की राज्य-सस्था के बिना लोग स्वय उच्च, पारमार्थिक और आदर्श जीवन जी सके-ऐसा अतिम आदर्श Finaal goal माना गया है। पुलिस, फौज, अदालत और राज्य नाम की सत्ता की आवश्यकता ही न हो ऐसा कब सभव है ? यह स्थिति तभी प्राप्त हो सकती है जव समस्त मानव समाज मानवता की-'शिवमस्तु सर्वजगतः' कीभावना से विभूपित हो जाय, स्वार्थ और सकुचितता के स्थान पर परमार्थ और समभाव को अपनाए । इस स्थिति को सच्चा और प्रत्यक्ष लोकशासन-Real, direct democracy-माना गया है। आत्मिक क्षेत्र मे भी ऐसी ही बात है। इन्द्रियो और मन के द्वारा जो अात्मतन्त्र चल रहा है उसके स्थान पर स्वय आत्मा के द्वारा ही अपना तन्त्र प्रत्यक्ष (Direct ) रूप मे चले, और इन्द्रियाँ, मन आदि किसी तन्त्र की, किसी अधिकारी वर्ग की, किसी सत्ता की या किसी माध्यम की आव
SR No.010147
Book TitleAnekant va Syadvada
Original Sutra AuthorN/A
AuthorChandulal C Shah
PublisherJain Marg Aradhak Samiti Belgaon
Publication Year1963
Total Pages437
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Philosophy
File Size13 MB
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